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Fact Check: पोस्टर हटाए या कमरे में घुसकर तोड़फोड़? जोबनेर कृषि यूनिवर्सिटी का वायरल वीडियो का सच

Fact Check: पोस्टर हटाए या कमरे में घुसकर तोड़फोड़? जोबनेर कृषि यूनिवर्सिटी का वायरल वीडियो का सच
जयपुर
04 Aug 2026, 02:20 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है। दावा ये कि जोबनेर के SKN कृषि महाविद्यालय के 3 छात्रों का ट्रांसफर इसलिए कर दिया गया क्योंकि उन्होंने हॉस्टल से RSS के पोस्टर हटा दिए थे। इस दावे को कई सोशल मीडिया अकाउंट्स ने शेयर किया। जिसका हमने फैक्ट चेक किया। इसमें जो निकल कर आया वो आपका सिर घुमा देगा।

मीडिया ने चलाई गलत खबरें, डोटासरा ने गलत पोस्ट भी की

दरअसल कुछ मीडिया संस्थानों ने भी बिना पूरी पड़ताल के यह खबर प्रकाशित कर दी कि छात्रों को केवल RSS पोस्टर हटाने की वजह से सजा दी। राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पोस्ट की। उन्होंने लिखा कि परिसर में RSS के पोस्टर लगे थे और उन्हें हटाने वाले छात्रों को दंडित किया गया। यानी डोटासरा ने भी पोस्ट करने से पहले पूरे मामले की जांच की जहमत तक नहीं उठाई और सियासी हित साधते हुए ये पोस्ट कर दी।

इसी तरह किसान महासभा के नेता बनवारी लाल कुड़ी ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन से फोन पर तीखी बातचीत की। इस बातचीत का ऑडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना।

छात्र के कमरे में लगे पोस्टर उचाड़े गए

हमारे फैक्ट चेक में ये सामने आया कि मामला केवल पोस्टर हटाने का नहीं है। आरोप है कि तीन छात्र एक दूसरे छात्र के हॉस्टल कमरे का ताला तोड़कर अंदर घुसे थे। इसके बाद कमरे की दीवारों पर लगे भारत माता और श्रीराम मंदिर के चित्रों को हटाया या फाड़ा गया। यहीं नहीं, इस पूरी घटना का वीडियो भी बनाया गया। बाद में उसे सोशल मीडिया पर "क्लीनिंग प्रोग्राम" और "गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल" जैसे गानों के साथ अपलोड किया गया।

पीड़ित छात्र ने थाने में शिकायत कराई दर्ज

तो मामला सिर्फ पोस्टर हटाने का नहीं बल्कि दूसरे छात्र के कमरे में अवैध प्रवेश, उनकी पर्सनल चीजों से छेड़छाड़, व्यक्तिगत आस्था का अपमान, और संभावित निजता के उल्लंघन से भी जुड़ जाता है। इस घटना के बाद पीड़ित छात्र ने कॉलेज प्रशासन और जोबनेर थाने दोनों जगह शिकायत दी है। लेकिन कॉलेज प्रशासन ने शुरुआत में छात्रों के भविष्य को देखते हुए पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ाने के बजाय समझाइश का रास्ता अपनाया और तीनों छात्रों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उनका ट्रांसफर कर दिया। यानी फैक्ट चेक में पता चलता है कि इस कार्रवाई का आधार केवल विचारधारा नहीं बल्कि कथित अनुशासनहीनता बताया गया।

RSS से जुड़ने का कोई दबाव नहीं

अब बात उस दावे की जिसमें कहा गया कि छात्रों पर किसी संगठन विशेष से जुड़ने का दबाव बनाया जा रहा था। तो अब तक सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आया है जिससे ये पुख्ता हो सके कि छात्रों ने घटना से पहले कॉलेज प्रशासन, विश्वविद्यालय या पुलिस के पास ऐसी कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। अगर किसी छात्र पर वास्तव में वैचारिक दबाव बनाया गया हो, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

अब देखना होगा कि क्या इस पूरे मामले की कोई जांच आगे होती है या नहीं। तो याद रखिए कि सोशल मीडिया के दौर में आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना हमेशा सही नहीं होता। हर वायरल दावे की तरह इस मामले में भी जरूरी है कि दस्तावेज, शिकायत और आधिकारिक रिकॉर्ड को देखा जाए।

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