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कमलेश प्रजापत एनकाउंटर मामले में SP आनंद शर्मा समेत 24 पुलिस अधिकारियों को कोर्ट से मिली बड़ी राहत

कमलेश प्रजापत एनकाउंटर मामले में SP आनंद शर्मा समेत 24 पुलिस अधिकारियों को कोर्ट से मिली बड़ी राहत
राजस्थान
19 Jun 2026, 04:13 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Kamlesh Prajapat Encounter: बाड़मेर के बहुचर्चित केस कमलेश प्रजापति एनकाउंटर मामले में SP आनंद शर्मा समेत 24 पुलिस अधिकारियों को कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। जोधपुर महानगर सेशन कोर्ट ने ये माना है कि कमलेश प्रजापत ने भागने की कोशिश करते वक्त पुलिस की टीम पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की। इसके साथ ही कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें उसने सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक रिपोर्ट को महत्व ना देते हुए क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी थी।

क्या था मामला

बता दें कि तत्कालीन पचपदरा विधायक मदन प्रजापत और प्रजापत समाज के लोगों ने 22 अप्रैल 2021 को बाड़मेर में हुए कमलेश प्रजापत का पुलिस एनकाउंटर मामले की जांच की मांग उठाई थी। उनका कहना था कि ये फेक एनकाउंटर था। कमलेश प्रजापत ऐसा कोई काम नहीं किया था जिससे उनका एनकाउंटर किया जाए।

इस एनकाउंटर को लेकर बड़े स्तर पर धरना प्रदर्शन, आंदोलन तक हुए थे। इनकी मांग पर ही इस केस की जांच सरकार ने CBI को सौंप दी थी। CBI ने अपनी जांच में इस एनकाउंटर को सही माना था और कमलेश प्रजापत को दोषी। CBI की रिपोर्ट को कमलेश प्रजापत की पत्नी ने ट्रायल कोर्ट में चुनौती थी। ट्रायल कोर्ट में फिर इसे हत्या का केस माना गया था।

कमलेश प्रजापत पर किस मामले में कार्रवाई?

दरअसल 22 अप्रैल 2021 की रात को कमलेश प्रजापत के अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी और दूसरे आपराधिक मामलों में लिप्त होने का इनपुट पुलिस को मिला था। जिसके बाद पुलिस की टीम रात को ही सदन थाना इलाके में उनके घर पर दबिश देने चली गई। जैसे ही पुलिसकर्मियों ने कमलेश के आवास की घेराबंदी की तो उसने भागने की कोशिश की। उसने अपनी XUV में बैठकर गेट का मेन गेट तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की। उसे रोकने के लिए वहां पर पुलिसकर्मियों की टीम तैनात थी। पुलिस का आरोप था कि कमलेश ने भागने के चक्कर में पुलिस पर गाड़ी चढ़ाकर उन्हें रौंदने की कोशिश की।

कमेलश की इस हरकत से खुद को बचाने के लिए पुलिस अधिकारियों ने गाड़ी के टायर और ड्राइवर की सीट के पास गोलियां चलाईं। लेकिन इनमें से एक गोली कमलेश को लग गई। पुलिस जब कमलेश को अस्पताल लेकर गई तो वहां पर उसे डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया।

कमलेश के घर से बड़ी मात्रा में मिला था अवैध सामान

इसके बाद पुलिस ने कमलेश के घर की तलाशी भी ली। जिसमें उसके घर से अवैध हथियार, अफीम का दूध, लग्जरी गाडियां, बड़ी मात्रा में कैश बरामद किया गया। पुलिस ने इन सबका खुलासा करते हुए बताया कि ये सारे सबूत कमलेश के एक खूंखार अपराधी की छवि दिखाते हैं। लेकिन प्रजापत समाज ने इसे जातिगत भावना से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि ये सोची-समझी राजनीतिक हत्या की गई है। परिवार ने आरोप लगाया था कि तब बाड़मेर की पचपदरा रिफाइनरी के करोड़ों रुपए के ठेकों को लेकर कमलेश प्रजापत और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री हरीश चौधरी के भाई के बीच विवाद चल रहा था. इसलिए ये हत्या कराई गई है।

सरकार पर सवाल उठते ही तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले की जांच CBI को सौंप दी थी। जिसमें CBI ने पुलिस को क्लीनचिट दे दी थी। तब से अशोक गहलोत और हरीश चौधरी के बीच काफी विवाद पैदा हो गए थे। हरीश चौधरी के कई समर्थक तब जयपुर में अशोक गहलोत से मिलने आए थे। लेकिन गहलोत अपने फैसले से टस से मस नहीं हुए। जिसके बाद कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी फिर सामने आई थी और तब ये मामला राष्ट्रीय सुर्खियां तक बन गया था।

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