पांचना बांध पर सरकार को किरोड़ी ने लिखा लेटर, पानी छोड़ने की उठाई मांग

Panchana Dam: राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने अब पांचना बांध पर विवाद को लेकर किरोड़ी लाल मीणा ने राजस्थान सरकार को पत्र लिखा है। उन्होंने सरकार से पांचना बांध का पानी छोड़ने की अपील की है। जिससे जरूरतमंद किसानों को उनके हिस्से का पानी मिल सके। उन्होंने (Kirodi Lal Meena) कहा कि बांध के कमांड एरिया के नागरिकों ने निर्मित नहरों में पानी खोलने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना कराने लिए सवाई माधोपुर की वजीरपुर तहसील के खंडीप गांव में धरना दिया हुआ है। वो मुझे बार-बार इस मामले में दखल देने के लिए कह रहे हैं। जिससे मुझे मजबूरन कदम उठाना पड़ेगा।
बता दें कि करौली का पांचना बांध किसानों की किस्मत बदलने के लिए बना था लेकिन पिछले दो दशकों से इस पर सिर्फ विवाद चल रहा है।
किरोड़ी मीणा ने और क्या लिखा लेटर में
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में साफ कहा है पांचना बांध 1977 से 2004 के बीच बना था। उस समय उसकी लागत 125 करोड़ रुपए थी। कुछ वजहों से 2006 से पांचना बांध का पानी कमांड एरिया के लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। गांव में सिंचाई को छोड़िए पीने के पानी की भी भारी कमी आ गई है। इससे 35 गावों के 1.25 लाख नागरिकों को हर साल 200 करोड़ रुपए की आर्थिक हानि हो रही है। इस तरह से पानी रोककर अब तक कमांड एरिया के किसानों को 4 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हो गया है। जिससे पलायन और बेरोजगारी की समस्या बढ़ रही है। राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद पिछले 4 साल से प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
क्या है विवाद?
पांचना बांध के कमांड एरिया दो पक्षों में बंटा हुआ है। पहले पक्ष में वो 39 गांव आते हैं जहां गुर्जर समुदाय की बहुलता हैं। इनकी जिनकी जमीनें इस बांध को बनाने के लिए डूब गई थीं। इनका कहना है कि जब तक हमें पूरा मुआवजा और पुनर्वास की सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक पानी नीचे नहीं जाने दिया जाएगा। पहला हक हमारा है।
वहीं दूसरे पक्ष में वो 35 गांव आते हैं जहां मीणा, जाट और ओबीसी समुदाय की बहुलता है जिन्हें सिंचाई के लिए इस पानी की जरूरत है। इनका कहना है कि पिछले 20 साल से इनके हक का पानी रोक कर इनकी फसलों को सुखाया जा रहा है।
हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त आदेश दिए थे कि नहरों की सफाई करके तुरंत पानी छोड़ा जाए, लेकिन ग्राउंड पर स्थिति 'जस की तस' बनी हुई है। आलम यह है कि किसान संगठनों ने मांग पूरी ना होने पर 28 जून को राजस्थान में बड़े 'रेल चक्का जाम' का अल्टीमेटम भी दे दिया है।
किरोड़ी लाल मीणा ने कहा है कि अड़ने से नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के पटेलों और मौजिज लोगों को एक साथ बिठाकर, भाईचारे से इस 20 साल पुराने गतिरोध को खत्म किया जाएगा।
अब गेंद पूरी तरह से मुख्यमंत्री और राज्य प्रशासन के पाले में है। एक तरफ कोर्ट का डंडा है, दूसरी तरफ किसानों का 28 जून का अल्टीमेटम और तीसरी तरफ अपस्ट्रीम के गांवों का अपना विरोध। किरोड़ी लाल मीणा के इस लेटर पर सरकार का क्या एक्शन होता है अब इस पर पूरे प्रदेश की नजरें बनी हुई हैं।
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