किरोड़ी ने खत्म कराया धरना लेकिन गुर्जर समुदाय के मन में क्या? 28 जून को क्या होगा?

Kirodi Lal Meena: पानी की एक-एक बूंद के लिए क्या दो बड़े समुदाय आमने-सामने आ चुके हैं? क्या 28 जून को पूर्वी राजस्थान में कोई बड़ा बवंडर आने वाला है? भले ही पांचना बांध पर गतिरोध को कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने 6 दिन में पानी छोड़ने के आश्वासन के बाद शांत कर लिया है लेकिन अभी भी गुर्जर समाज के लोग शांत नहीं है। महिलाओं तक को समाज के लोगों ने लाठी-डंडों के साथ पांचना बांध पर खड़ा किया हुआ है। ऐसे में इस बात की अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगर 6 दिन में पानी छोड़ा गया और गुर्जरों की बात नहीं मानी गई तो 28 तारीख को कहीं कोई अनहोनी ना हो जाए।
दरअसल ये लड़ाई दो जिलों के 74 गांवों की है। एक तरफ कैचमेंट एरिया यानी डूब क्षेत्र के 39 गांव हैं, जहां गुर्जर समुदाय की बहुलता है। इनका साफ कहना है कि बांध के लिए जमीनें इनकी गईं, डूब में इनके घर आए, तो पानी पर पहला हक इनका है। वहीं दूसरी तरफ, कमांड एरिया के 35 गांव हैं-जहां मीणा समुदाय बड़ी संख्या में है। उनकी मांग है कि हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक तुरंत नहरों में पानी छोड़ा जाए, क्योंकि पिछले 20 साल से वे सूखे का दंश झेल रहे हैं।
किरोड़ी मीणा के आश्वासन के बाद खत्म हुआ आश्वासन
इधर बीते 24 जून को ही सवाई माधोपुर के खंडीप में मीणा समाज की एक बहुत बड़ी महापंचायत हुई थी। जिसमें गंगापुर सिटी से कांग्रेस विधायक रामकेश मीणा, टोडाभीम से विधायक घनश्याम महर, और खुद कैबिनेट कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और गोलमा देवी मौजूद रहे। इस महापंचायत में अल्टीमेटम दिया गया था कि अगर 28 जून तक नहरों में पानी नहीं खुला, तो दिल्ली-मुंबई रेल ट्रैक जाम कर दिया जाएगा, हाईवे ठप कर दिए जाएंगे।
तभी कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने महापंचायत के मंच से किसानों को एक हफ्ते में पानी खुलवाने का ऐलान किया और इसका लिखित आश्वासन दिया जिसके बाद खंडीप का धरना शांत हुआ है। लेकिन... असली परीक्षा अब शुरू होती है। क्योंकि दूसरी तरफ गुर्जर समाज को सीधे तौर पर सपोर्ट मिल रहा है कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के बेटे विजय बैंसला और हाकिम बैंसला का! गुर्जर नेताओं का साफ कहना है कि 'अगर हमें छेड़ा गया, तो हम छोड़ेंगे नहीं। पांचना की एक बूंद पानी आगे नहीं जाने देंगे।'
वोट बैंक है बड़ी समस्या!
इस पूरी जंग में राजस्थान की सियासत के सबसे बड़े चेहरे, सचिन पायलट की खामोशी बहुत कुछ बयां करती है। पायलट इस पूरे मामले में सामने आकर किसी भी पक्ष में नहीं बोल रहे हैं। इसकी वजह बहुत साफ है-राजस्थान की राजनीति में मीणा और गुर्जर, दोनों ही सबसे मेजर और निर्णायक वोट बैंक हैं। अगर पायलट या कोई भी बड़ा नेता किसी एक पक्ष में खड़ा होता है, तो उसे दूसरे पक्ष की भारी नाराजगी और एक बड़ा सियासी नुकसान झेलना पड़ सकता है। यही वजह है कि नेता फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।
हाईकोर्ट 3 बार दे चुका है आदेश
हाई कोर्ट तीन बार सख्त आदेश दे चुका है कि कमांड क्षेत्र में पानी छोड़ा जाए। प्रशासन के सामने चुनौती दोहरी है-एक तरफ अदालत के आदेश का पालन करना है, तो दूसरी तरफ कानून व्यवस्था को बनाए रखना है।
लाठियां तन चुकी हैं, अल्टीमेटम दिए जा चुके हैं और प्रशासन के हाथ-पांव फूले हुए हैं। क्या किरोड़ी लाल मीणा का आश्वासन इस सुलगती आग को शांत कर पाएगा या 28 जून को राजस्थान की पटरियां और सड़कें फिर से सुलग उठेंगी? ये सवाल बना रहेगा जब तक बांध का पानी कैचमेंट एरिया में छोड़ा नहीं जाता।
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