किडनी ट्रांसप्लांट नहीं किया तो जहर देकर मार दो...डायलिसिस पर पड़ीं प्रसूताओं के परिजनों का अस्पताल को अल्टीमेटम

Kota Pregnant Women: प्रदेश के कोटा जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल कोटा मेडिकल कॉलेज में 3 प्रसूताओं की मौत ने पूरे राजस्थान को हिला दिया था। वहीं डैमेज किडनी से जूझ रहीं हुईं महिलाओं के परिजनों ने अब कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है और मांग की है कि प्रसूताओं की किडनी या तो ट्रांसप्लांट कराएं या फिर उन्हें जहर दे दें क्योंकि इतना खर्चा वो नहीं उठा पा रहे हैं और महिलाओं इस दर्दनाक इलाज को नहीं सह पा रही हैं।
48 घंटे में किडनी ट्रांसप्लांट हो वरना बिना डायलिसिस के रहेंगी प्रसूताएं
इस ज्ञापन में परिजनों ने लिखा है कि प्रसूताएं नहीं चाहतीं कि बार-बार डायलिसिस हो। क्योंकि इस तरह तो जिंदगी भर इस डायलिसिस का बोझ सहना पड़ेगा ये बहुत दर्दनाक और होता है। साथ ही परिवार इतना खर्चा नहीं उठा पा रहा है। इन प्रसूताओं में रागिनी मीणा, आरती चौबदार, पिंकी, सुशीला, धन्नी सुमन भर्ती हैं। इसलिए इनकी किडनी ट्रांसप्लांट कराई जाए। ज्ञापन में ये भी लिखा है कि अगर 48 घंटे में इनकी किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हुईं तो सभी प्रसूताएं बिना डायलिसिस के ही अस्पताल में भर्ती रहेंगी।
नकली दवाओं की वजह से खराब हुई थी किडनी
परिजनों ने इस शिकायत पत्र में ये भी बताया है कि प्रसूताओं की किडनियां नकली दवाओं से ही खराब हुई है। इसलिए ये अस्पताल की नैतिक जिम्मेदारी है कि प्रसूताओं की किडनी का ट्रांसप्लांट कराएं। गौरतलब है कि ये प्रसूताएं 70 दिन से अस्पताल में भर्ती हैं।
जमा पूंजी सब खपा दी और किडनी खराब हो गई
पीड़ित महिलाओं के परिजनों का कहना है कि इलाज के लिए उन्हें अपनी जमा पूंजी खर्च करनी पड़ रही है। कुछ परिवारों ने इलाज का खर्च उठाने के लिए अपना घर-जमीन तक बेचा है। कुछ ने संपत्तियों को गिरवी रखा है। एक पीड़ित परिवार ने बताया कि प्रसूता की हालत बिगड़ने के बाद लगातार डायलिसिस कराना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक संकट गहरा गया है।
क्या है पूरा मामला?
कोटा के सरकारी अस्पतालों में प्रसव और सर्जिकल प्रक्रियाओं के बाद कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आए थे। 3 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि 5-6 प्रसूताएं किडनी डैमेज से जूझ रही हैं। इन घटनाओं के बाद चिकित्सा इंतजाम और संभावित लापरवाही को लेकर सवाल उठे थे।
परिजनों की ये हैं मांगें-
-प्रसूताओं को विशेष इलाज सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
-लंबे समय तक चलने वाले डायलिसिस और बाकी का इलाज।
-परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाए।
-मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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