करोड़ों का लोन लेकर 99 लाख की सरकारी सब्सिडी भी ले गए मंत्री भागीरथ चौधरी, जवाब मिला- कुछ छिपाया थोड़े ही है

जरा सोचिए एक मंत्री करोड़ों रुपए का लोन बैंक से लेता है और अपने ही विभाग से एक करोड़ की सब्सिडी भी ले ली, वाह मंत्री जी वाह....यानी कोरोड़ों का लोन भी अपना और सरकारी सब्सिडी भी अपनी, जी हां कुछ ऐसा ही किया है, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री और अजमेर सांसद भागीरथ चौधरी ने। तकनीकी रूप से वे बिल्कुल सही हो सकते हैं। उन्होंने बैंक से 2 करोड़ का लोन लिया, बकायदा गाइडलाइंस का पालन किया। लेकिन एक बड़ा और गंभीर नैतिक सवाल यहीं से खड़ा होता है—क्या एक रसूखदार पद पर बैठे व्यक्ति का, अपने ही प्रशासनिक नियंत्रण वाले विभाग से करीब एक करोड़ (99.60 लाख रुपये) की सब्सिडी लेना उचित है?
किसी से कुछ छिपाया नहीं, 2018 से आवेदन किया हुआ है- भागीरथ चौधरी
वहीं मंत्री भागीरथ चौधरी का बयान भी सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा कि मैं एक किसान हूं और बचपन से खेती कर रहा हूं...मैंने कुछ नहीं छिपाया है। हजारों किसान पॉलीहाउस लगाते हैं और सब्सिडी का फायदा उठाते हैं। तो मैंने भी उसी के तहत सब्सिडी लिया था। मैंने 2018 में अप्लाई किया था। मैंने वहां एक बोर्ड लगाया है और अपने लिए गए सभी लोन और सब्सिडी के बारे में बताया है। मैं वहां किसानों को नई तकनीक और नेचुरल फार्मिंग की ट्रेनिंग भी देता हूं...तो, मैंने कुछ छिपा के थोड़ी काम किया?.
किसलिए लिया था ये लोन?
दरअसल भागीरथ चौधरी ने ये भारी-भरकम सब्सिडी 'नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड' (NHB) की योजना के तहत पाई है। उन्होंने डीडवाना-कुचामन के पीह गांव में अपने निजी फार्म हाउस पर खीरा प्रोजेक्ट के पॉली हाउस के लिए ये लोन लिया था। ये बोर्ड सीधे तौर पर उसी कृषि मंत्रालय के अधीन आता है, जिसके वे खुद राज्य मंत्री हैं। जब योजना को मंजूरी देने वाली संस्था और उसे प्राप्त करने वाले माननीय का दफ्तर एक ही हो, तो आम जनता के मन में कुछ सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या इतनी आसानी से आम आदमी को मिलता लोन?
प्रशासनिक सिद्धांतों के मुताबिक, कोई भी लोकसेवक ऐसी प्रक्रिया का हिस्सा या लाभार्थी नहीं होना चाहिए, जहां उसके पद का प्रभाव पड़ सकता हो। भले ही आवेदन नियमों के तहत हुआ हो, पर अपने ही विभाग से करोड़ रुपये की सब्सिडी पास होना नैतिक रूप से असहज करने वाला है। वहीं देश का एक आम किसान जब कृषि लोन या छोटी सी सब्सिडी के लिए सरकारी दफ्तरों, बैंकों और पटवारियों के चक्कर काटकर थक जाता है, तब उसी व्यवस्था के शीर्ष पर बैठे मंत्री जी के 16,592 वर्ग मीटर के 'खीरा प्रोजेक्ट' को इतनी सहजता से मंजूरी मिल जाती है। भागीरथ चौधरी वे राजस्थान के गिरते वाटर टेबल और नई तकनीक का हवाला दे रहे हैं।
कांग्रेस ने खड़ा किया बीजेपी के खिलाफ मोर्चा
इस पर कांग्रेस कहां पीछे हटने वाली थी। कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार के मंत्री भागीरथ चौधरी का बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है।कृषि राज्य मंत्री भागीरथ ने अपने ही मंत्रालय से 99 लाख रुपए की सब्सिडी उठा ली - खीरे की खेती के लिए। मंत्री बनने के कुछ ही महीनों बाद ये खेल किया गया। भागीरथ ने अप्रैल 2025 में सब्सिडी मांगी और सिर्फ 14 दिन में अप्रूवल भी मिल गया।ये सीधे तौर से पद के दुरुपयोग का मामला है। मंत्री बनकर जनता के पैसों की लूट का मामला है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रियों को खुली छूट दे रखी है। संदेश साफ है - खुद खाओ, मुझे भी खिलाओ, जमकर लूट मचाओ। इस खुलासे के बाद भागीरथ चौधरी को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उनका इस्तीफा लिया जाए और उनके भ्रष्टाचार की जांच की जाए।
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