पांचना के बाद अब मोरेल बांध पर किसानों ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा, 1 जुलाई को महापंचायत

Morel Dam Mahapanchayat: करौली के पांचना बांध पर जैसे तैसे गतिरोध टूटा, कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने गुर्जर और मीणा किसानों को मनाया लेकिन अब दौसा के मोरेल बांध पर गतिरोध शुरु हो गया है। इस बांध में लगातार आ रहे दूषित और केमिकल वाले पानी के विरोध में अब किसानों और ग्रामीणों ने बड़ा आंदोलन छेड़ने का फैसला किया है। इस मुद्दे को लेकर 1 जुलाई को मोरेल बांध पर विशाल महापंचायत का ऐलान किया गया है। इसमें दौसा और सवाई माधोपुर के सैकड़ों गांवों के हजारों किसानों के शामिल होने की तैयारी है।
बीते शनिवार को मोरेल बांध के समीप भेडोली गांव स्थित राजकीय विद्यालय में किसान प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की बैठक हुई। इसमें ये फैसला लिया गया कि जयपुर शहर के अमानीशाह नाले और सांगानेर के रंगाई-छपाई उद्योगों से निकलने वाले केमिकल वाले पानी को मोरेल बांध में आने से रोकने के लिए व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा।
दूषित पानी रोकने की उठी मांग
बैठक में किसानों ने कहा कि प्रदूषित पानी को मोरेल बांध में पहुंचने से पहले ही किसी दूसरी जगह पर डायवर्ट किया जाए। उनका कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो बांध का जल पूरी तरह प्रदूषित हो जाएगा, जिसका सीधा असर खेती, पशुधन, भूजल और लाखों लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
किसानों ने बताई गंभीर चिंताएं
किसानों और पर्यावरण से जुड़े लोगों का कहना है कि फैक्ट्रियों का केमिकलयुक्त पानी ढूंढ नदी के रास्ते मोरेल नदी में पहुंच रहा है, जिससे बांध का पानी प्रभावित हो चुका है। उनका दावा है कि इससे खेतों की उर्वरता घट रही है, फसलें खराब हो रही हैं, पशु बीमार पड़ रहे हैं और भूजल भी प्रदूषित हो रहा है। ग्रामीणों ने कैंसर, चर्म रोग और पेट संबंधी बीमारियों के बढ़ते खतरे को लेकर भी चिंता जताई।
21 सदस्यीय समिति का गठन
महापंचायत की तैयारियों के लिए 21 सदस्यीय समिति बनाई गई है। समिति 29 जून को लालसोट और बौली के उपखंड अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेगी और 1 जुलाई की महापंचायत को सफल बनाने के लिए गांव-गांव जनसंपर्क अभियान चलाएगी।
क्यों अहम है मोरेल बांध?
मोरेल बांध को एशिया के सबसे बड़े कच्चे बांधों में गिना जाता है और ये दौसा और सवाई माधोपुर के दर्जनों गांवों की सिंचाई व्यवस्था और जलापूर्ति का प्रमुख स्रोत है। पिछले सालों में इसके भरने से दोनों जिलों के किसानों को सिंचाई का फायदा मिला था, लेकिन अब प्रदूषण का मुद्दा इस अहम जलस्रोत के भविष्य पर सवाल खड़े कर रहा है।
ये भी पढ़ें- करोड़ों का लोन लेकर 99 लाख की सरकारी सब्सिडी भी ले गए मंत्री भागीरथ चौधरी, जवाब मिला- कुछ छिपाया थोड़े ही है
इस लिंक को शेयर करें

