पांचना के बाद अब मोरेल बांध बना सरकार का सिर दर्द, अब क्या करेंगे किरोड़ी लाल मीणा

Morel Dam: राजस्थान के पांचना बांध के दो दशक पुराने विवाद का कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने जिस ऐतिहासिक और सकारात्मक तरीके से समाधान निकला है, उसने राजस्थान के लोगों में एक नई उम्मीद जगा दी है। हालांकि इसके बाद से ही दौसा और सवाई माधोपुर क्षेत्र की जीवनरेखा कहे जाने वाले मोरेल बांध को लेकर भी किसानों का रोष सामने आ रहा है। इसी से जुड़ा एक लेटर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जो अब चर्चा का केंद्र बन गया है।
जिला कलेक्टर को लिखा लेटर
ये लेटर सवाई माधोपुर के पीलोदा गांव के निवासी राजेंद्र कुमार मीणा का लिखा हुआ है जो उन्होंने जिला कलेक्टर को लिखा है। उन्होंने मोरेल बांध में बढ़ते भयानक जल प्रदूषण पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है। लाखों किसानों और ग्रामीणों की शिकायत है कि जयपुर क्षेत्र का सीवरेज और कारखानों से निकलने वाला रासायनिक अपशिष्ट सीधे मोरेल नदी के जरिए बांध में पहुंच रहा है। इससे ना केवल खेती और पीने के पानी की गुणवत्ता खराब हो रही है, बल्कि स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर होगी जांच
अब इस पत्र के बाद प्रशासनिक हलचल शुरू हुई है। अधिकारियों ने बांध में भारी प्रदूषण की बात स्वीकार करते हुए Water Test Report की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। अब जनता और पर्यावरण विशेषज्ञों की मांग है कि इस मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समक्ष मजबूती से उठाया जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस तरह कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा (किरोड़ी बाबा) ने पाचना बांध के मुद्दे को मुकाम तक पहुंचाया, ठीक उसी अब मोरेल बांध को बचाने के लिए समाधान करें।
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