निकाय चुनाव जीतने के अगने दिन पार्षद प्रत्याशी की मौत, आखिर ऐसा क्या हुआ?

Pali: राजस्थान के पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन से निकाय चुनाव के बीच एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। नगर पालिका के वार्ड नंबर 7 से चुनाव जीतने वाले निर्दलीय पार्षद अबरार खान मेव की चुनाव परिणाम घोषित होने के अगले ही दिन अचानक मौत हो गई। सोमवार को चुनाव जीतने की खुशी मना रहे अबरार खान के परिवार और समर्थकों के लिए मंगलवार सुबह यह खुशी मातम में बदल गई।
चाय पीते समय अचानक सीने में हुआ दर्द
जानकारी के मुताबिक, 58 वर्षीय अबरार खान मेव मंगलवार सुबह चाय पी रहे थे। इसी दौरान अचानक उनके सीने में दर्द हुआ और तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स में मौत की वजह हार्ट अटैक बताई गई है।
अबरार खान के निधन की खबर मिलते ही परिवार, समर्थकों और स्थानीय लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। चुनाव जीतने के महज एक दिन बाद हुई उनकी मौत से पूरे इलाके में लोग स्तब्ध हैं।
कांग्रेस से टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय लड़ा चुनाव
अबरार खान मेव ने इस निकाय चुनाव में कांग्रेस से टिकट की मांग की थी, लेकिन टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर वार्ड नंबर 7 से चुनाव लड़ा। चुनाव परिणाम में उन्होंने जीत दर्ज कर पार्षद का चुनाव जीता था।
मारवाड़ जंक्शन को पहली बार नगर पालिका का दर्जा मिलने के बाद यहां हुए यह शुरुआती निकाय चुनाव थे। ऐसे में अबरार खान की जीत को स्थानीय राजनीति में भी अहम माना जा रहा था।
25 वार्डों वाली नगर पालिका में बीजेपी-कांग्रेस बराबर
मारवाड़ जंक्शन नगर पालिका में कुल 25 वार्ड हैं। चुनाव परिणाम में बीजेपी और कांग्रेस ने 11-11 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि 3 वार्ड निर्दलीयों के खाते में गए। किसी भी पार्टी को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला।
बहुमत के लिए 13 पार्षदों की जरूरत थी। ऐसे में तीन निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बोर्ड गठन में बेहद अहम हो गई थी। अब अबरार खान मेव के निधन के बाद नगर पालिका के बोर्ड गठन का सियासी गणित भी बदल गया है।
बोर्ड गठन का गणित भी बदला
अबरार खान के निधन से अब बीजेपी और कांग्रेस के सामने बोर्ड बनाने को लेकर नया समीकरण खड़ा हो गया है। चुनाव परिणाम के बाद दोनों प्रमुख दल निर्दलीय पार्षदों के समर्थन के जरिए बहुमत हासिल करने की कोशिश में थे। अब एक निर्वाचित पार्षद की मौत के बाद आगे की प्रक्रिया और बोर्ड गठन का रास्ता निर्वाचन नियमों के तहत तय होगा।
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