आ ही गया राजस्थान की किस्मत बदलने का ‘शुभ’ दिन, पचपदरा रिफाइनरी के साथ PM मोदी देंगे इन विकास कार्यों की सौगात

जिस घड़ी का इंतजार लंबे अरसे से राजस्थान को था आखिर वो वक्त, वो दिन आ ही गया। राजस्थान की किस्मत बदलकर उसकी विकास गाथा लिखने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को बालोतरा आ रहे हैं। यहां 79,459 करोड़ रुपए की लागत से बनी तेल रिफाइनरी का उद्घाटन करेंगे और 13 साल से विकास और रोजगार की राह तक रहे हजारों युवाओं के सपनों को पंख देंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रिफाइनरी के साथ ही जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल, संशोधित उड़ान योजना की शुरुआत, जयपुर मेट्रो फेज-2 का शिलान्यास (वर्चुअली), 54 हजार अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र बांटेंगे (वर्चुअली)। ये सारे विकास कार्य 1.06 लाख करोड़ की लागत के हैं। राजस्थान में इनकी शुरूआत होने से राज्य विकास की सड़क पर एक तेज रफ्तार पकड़ेगा।
13 साल से अपने शुरू होने की राह तक रही रिफाइनरी
पचपदार रिफाइनरी देश का पहला ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है। इसे HPCL और राजस्थान सरकार के संयुक्त उपक्रम HRRL ने विकसित किया है। 13 साल पहले इसकी लागत 37 हजार करोड़ थी लेकिन अब इसकी लागत 79,459 करोड़ रुपए हो गई है। इस रिफाइनरी की क्षमता 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) है वहीं इसकी पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता करीब 2.4 MMTPA है। इस रिफाइनरी में राजस्थान सरकार की हिस्सेदारी 26% है और HPCL की हिस्सेदारी 74% है। इस रिफाइनरी का नेल्सन इंडेक्स 17.0 है और पेट्रो-केमिकल उत्पादन 26 प्रतिशत से ज्यादा है जो इले ग्लोबल पैरामीटर के अनुरूप बनाते हैं। ये देश की 23 वीं रिफाइनरी है। पचपदरा को मिलाकर इन सभी रिफाइनरियों की कुल शोधन क्षमता 250 मीट्रिक टन प्रति वर्ष से ज्यादा है।
2018 में पीएम मोदी ने सोनिया गांधी के बाद किया शिलान्यास
पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन सिर्फ आर्थिक रूप से नहीं बल्कि सियासी तौर पर भी काफी अहम है। ये राजस्थान में बीजेपी सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री मोदी का सबसे बड़े विकास कार्यक्रमों में से एक माना जा रहा है। केंद्रीय सरकार और राज्य सरकार इसे पश्चिमी राजस्थान के औद्योगिक भविष्य से जोड़कर देख रही हैं।
इसकी सियासत भी बेहद तगड़ी रही है। दरअसल 2013 में कांग्रेस की गहलोत सरकार ने जाते-जाते इसका शिलान्यास कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से कराया था। फिर 2018 में वसुंधरा राजे ने चुनाव से ठीक पहले PM मोदी के हाथों दोबारा शिलान्यास करा दिया। ऐसे में इस पचपदरा रिफाइनरी के क्रेडिट लेने की जंग दोनों पार्टियों में चलती रहती है। कांग्रेस ने परियोजना में देरी तो भाजपा विकास का दावा करती है।
कांग्रेस-बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप
कांग्रेस आरोप लगाती है कि सोनिया गांधी जब 22 सितंबर 2013 को नींव रख चुकी हैं तो भाजपा ने 16 जनवरी 2018 को फिर से शिलान्यास क्यों किया? इधर भाजपा ने कांग्रेस के पहले शिलान्यास को चुनावी स्टंट बताती है और दावा करती है कि तब ना जमीन अधिग्रहित थी और ना ही पर्यावरणीय मंजूरी मिली थी। यहां ध्यान देने वाली बात है कि 2013 में रिफाइनरी के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों और स्थानीय नेताओं के बीच विरोध प्रदर्शन तक हुए थे।
जब अगस्त 2025 तक रिफाइनरी बनकर तैयार हो गई लेकिन उत्पादन शुरू नहीं हुआ, तब कांग्रेस ने बीजेपी के जनवरी 2026 में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के दावों पर तंज कसा।
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