होम/rajasthan/rajasthan-high-court-building-could-collapse-iit-bombay-report

6 साल में ही इतना जर्जर हो गया राजस्थान हाईकोर्ट का भवन कि कभी भी गिर सकता है गुंबद, कोर्ट ने मांगा जवाब

6 साल में ही इतना जर्जर हो गया राजस्थान हाईकोर्ट का भवन कि कभी भी गिर सकता है गुंबद, कोर्ट ने मांगा जवाब
राजस्थान
12 Aug 2026, 05:02 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Jodhpur: राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर स्थित मुख्य पीठ के भवन को लेकर सामने आई IIT बॉम्बे एक स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में हाईकोर्ट भवन के करीब 21 मीटर ऊंचे सेंट्रल डोम की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया गया है। गुंबद और भवन के कुछ हिस्सों में स्ट्रक्चरल क्षति के चलते सुरक्षा को लेकर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। कोर्ट ने संबंधित सरकारी विभागों, निर्माण और रखरखाव से जुड़े अधिकारियों और तकनीकी संस्थानों से जवाब और समाधान का प्लान मांगा है। अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 24 अगस्त 2026 को होगी।

IIT बॉम्बे की रिपोर्ट में क्या सामने आया?

स्ट्रक्चरल ऑडिट में भवन के कई हिस्सों में जंग, कंक्रीट में क्षरण, दरार और नमी से जुड़ी समस्याएं सामने आने की बात कही गई है। रिपोर्ट में कार्बोनेशन और क्लोराइड की वजह से स्टील रिइन्फोर्समेंट में जंग बढ़ने की आशंका भी जताई गई है। इससे भवन के करीब 40 फीसदी हिस्से को संवेदनशील बताया गया है। ऐसे में समस्या केवल गुंबद तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भवन की स्ट्रक्चरल हेल्थ और रखरखाव व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है।

सिर्फ गुंबद नहीं, पहले भी सामने आती रही हैं खामियां

इस मामले का सबसे गंभीर पहलू ये है कि भवन में संरचनात्मक समस्याओं की शिकायतें नई नहीं हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले कुछ सालों में कोर्ट रूम, फॉल्स सीलिंग, छत और गुंबद के हिस्सों से जुड़ी घटनाएं सामने आती रही हैं।

2024 में कोर्ट रूम नंबर 2 में आग लगने की घटना के बाद फायर सेफ्टी सिस्टम को लेकर भी सवाल उठे थे। IIT जोधपुर के निरीक्षण में फायर सेफ्टी व्यवस्था में खामियां मिलने की बात सामने आई थी।

220 करोड़ की इमारत, फिर इतनी जल्दी कैसे बिगड़ी हालत?

जोधपुर हाईकोर्ट का नया भवन करीब 220 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ था। भवन का निर्माण कार्य 2008 में शुरू हुआ और दिसंबर 2019 में इसका उद्घाटन हुआ। विशाल सेंट्रल डोम इस भवन की प्रमुख वास्तु विशेषताओं में शामिल है।

भवन के रखरखाव पर हर साल करीब 2.20 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी लागत और लगातार रखरखाव खर्च के बावजूद भवन के महत्वपूर्ण हिस्से इतनी जल्दी गंभीर क्षति की स्थिति में कैसे पहुंच गए?

मरम्मत पर 57.65 करोड़ रुपये की आ सकती है लागत

सामने आई जानकारी के मुताबिक IIT बॉम्बे और अन्य तकनीकी जांचों में मिली खामियों के आधार पर भवन की मरम्मत और रेट्रोफिटिंग के लिए करीब 57.65 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया है। इसके साथ ही 24 घंटे स्ट्रक्चरल हेल्थ मॉनिटरिंग और एक समर्पित कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

24 अगस्त को अधिकारियों से मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, PWD और वित्त विभाग के प्रमुख सचिव, RSRDC के प्रबंध निदेशक और DGP समेत संबंधित अधिकारियों और IIT बॉम्बे और IIT जोधपुर के प्रतिनिधियों को 24 अगस्त को अदालत में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने निर्माण, सुरक्षा ऑडिट, रखरखाव और मरम्मत से जुड़े पक्षों की भूमिका और जवाब मांगा है। यानी अब मामला सिर्फ भवन की मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी जांच के दायरे में है कि आखिर इतनी गंभीर स्थिति पैदा होने तक जिम्मेदार तंत्र ने क्या कदम उठाए।

कौन है इसका जिम्मेदार

जोधपुर हाईकोर्ट भवन से जुड़ा यह मामला सरकारी निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता, निगरानी और रखरखाव व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। एक ऐसी इमारत, जिसमें न्यायाधीश, वकील, कर्मचारी और आम लोग रोजाना मौजूद रहते हैं, उसके सबसे प्रमुख संरचनात्मक हिस्से को लेकर IIT बॉम्बे की रिपोर्ट में गंभीर चिंता सामने आना साधारण मामला नहीं है।

ये भी पढ़ें- संजय शर्मा के धरने को लेकर PM मोदी से बेनीवाल ने पूछा सवाल, सरकार की प्रशासन पर कोई पकड़ नहीं


इस लिंक को शेयर करें

ads

लेटेस्ट खबरें

ads
© 2026 Bharat Raftar. All rights reserved. Powered By Zentek.