राजस्थान पंचायत निकाय चुनाव: BJP ने 7 दिन में बदली रणनीति, घनश्याम तिवाड़ी की एंट्री के बाद चुनावी समिति में बड़ा फेरबदल

Rajasthan Panchayat Elections 2026: 13 अक्टूबर से शुरु हो रहे राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर बीजेपी ने अपनी चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। महज 7 दिनों के भीतर पार्टी ने चुनाव संचालन समिति का पुनर्गठन किया और राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी को चुनावी घोषणा-पत्र यानी संकल्प पत्र समिति की कमान सौंपी दी। वहीं राजेंद्र राठौड़ जैसे कई नेताओं और पूर्व महापौरों को भी संगठनात्मक जिम्मेदारियां दीं। जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। क्योंकि पहले घनश्याम तिवाड़ी को जयपुर संभाग के चुनाव संचालन समिति की जिम्मेदारी दी थी।
7 दिन में बदली पूरी चुनावी रणनीति
बीजेपी ने पहले जारी की गई चुनाव समिति में संशोधन करते हुए कई नए नाम जोड़े हैं। पार्टी का फोकस अब केवल संगठनात्मक मजबूती तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय निकायों में प्रशासनिक अनुभव रखने वाले नेताओं को भी चुनावी अभियान का हिस्सा बनाया गया है। इसके पीछे उद्देश्य शहरी मतदाताओं तक ज्यादा प्रभावी पहुंच बनाना और स्थानीय मुद्दों पर मजबूत पकड़ बनाना माना जा रहा है।
बीते दिन पार्टी ने अपनी संभागीय चुनाव संचालन समिति की लिस्ट भी जारी कर दी थी। जिसमें जयपुर में प्रसन्न चंद मेहता और प्रभुलाल सैनी, शंकर सिंह को, उदयपुर में राजेंद्र राठौड़ और सीआर चौधरी को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं कोटा से सीपी जोशी, बीकानेर में ज्योति मिर्धा, भरतपुर से अशोक परनामी, अजमेर में अरुण चतुर्वेदी को जिम्मेदारी दी है।
पूर्व मेयरों के अनुभव पर दांव
पार्टी ने जयपुर समेत कई शहरों के पूर्व महापौरों को भी जिम्मेदारी दी है। जिससे ये साफ है कि पार्टी स्थानीय प्रशासन का अनुभव रखने वाले चेहरों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहती है। बीजेपी का मानना है कि ये नेता जमीनी स्तर पर चुनाव संचालन और स्थानीय समीकरणों को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं।
घनश्याम तिवाड़ी को मिली संकल्प पत्र समिति की जिम्मेदारी
भाजपा नेतृत्व ने वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी को घोषणा-पत्र समिति का संयोजक बनाया है। तिवाड़ी लंबे समय से संगठन और नीति निर्माण में सक्रिय रहे हैं।
निकाय चुनाव को लेकर भाजपा का बड़ा संदेश
राजस्थान में निकाय चुनाव को विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में भाजपा ने साफ संकेत दिया है कि वो संगठन, अनुभवी नेतृत्व और क्षेत्रीय संतुलन के दम पर चुनाव मैदान में उतरना चाहती है। अब तो नजर है कांग्रेस पर, कि वो अपनी चुनावी रणनीति क्या बनाती है और बीजेपी को कैसे टक्कर देती है।
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