इधर पांचना बांध पर जंग, उधर राजकुमार रोत ने पानी-बांध पर बीजेपी सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

Rajkumar Roat: पूर्वी राजस्थान में पांचना बांध पर खंडीप गांव में किसानों की महापंचायत हो रही है तो वहीं पश्चिमी राजस्थान में अब सांसद राजकुमार रोत ने भी बीजेपी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राजकुमार रोत ने बीजेपी सरकार को चेतावनी दी है कि "पहले हमारे हक का पानी हमें दो, हमारे लोगों की प्यास बुझाओ, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो।"
क्या है मामला?
राजस्थान सरकार ने बजट वर्ष 2026-27 के बिंदु संख्या 166 में 5 हजार 900 करोड़ रुपये की भारी-भरकम योजना की घोषणा की है। सरकार का प्लान है कि मानसून के दौरान माही नदी के अतिरिक्त पानी को फीडर नहर के जरिए 'सोम कमला आंबा बांध' तक ले जाया जाए और फिर वहां से इस पानी को जालौर और पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में डाइवर्ट कर दिया जाए।
लेकिन, जैसे ही ये खबर आई, डूंगरपुर-बांसवाड़ा सांसद राजकुमार रोत के तेवर तल्ख हो गए। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत को एक बेहद कड़ा पत्र थमा दिया है। रोत का साफ तर्क है कि दक्षिण राजस्थान का ये आदिवासी बेल्ट पूरी तरह से बारिश पर निर्भर है। जब हमारे खुद के गले सूखे हैं, तो हमारा पानी जालोर क्यों भेजा जा रहा है? इसे उन्होंने स्थानीय आदिवासियों की पीठ में छुरा घोंपने जैसा करार दिया है।

पश्चिमी राजस्थान का खुद का हलक सूखा
आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस क्षेत्र से नदियां बहती हैं, आज वहां के लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। प्रतापगढ़ का पीपलकुंट, सुहागपुरा, अरनोद, बांसवाड़ा का गनोड़ा, छोटी सरव, दानपुर, और सज्जनगढ़, डूंगरपुर का सागवाड़ा, गलियाकोट चिखली समेत कई इलाके आज भी रेगिस्तान की तरह सूखे की मार झेल रहे हैं। पानी नहीं होने की वजह से यहां की खेती तबाह हो चुकी है और सबसे बड़ा सच ये है कि यहां के स्थानीय आदिवासियों को मजबूरी में गुजरात जैसे राज्यों में रोजगार के लिए पलायन करना पड़ता है।
माही समझौते को कहा था काला कानून
खुद सांसद रोत ने संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे को उठाया है और पूर्व में हुए माही समझौते को इस क्षेत्र के लिए 'काला कानून' तक कह डाला है। क्योंकि यहां की नदियों का अधिकतम पानी तो वैसे ही गुजरात चला जाता है, और अब रही-बची कसर राज्य सरकार इस पानी को दूसरे जिलों में भेजकर पूरी करना चाहती है।
सांसद राजकुमार रोत का कहना है कि पहले स्थानीय किसानों की प्यास बुझाओ, पहले यहां सिंचाई परियोजनाएं लाओ ताकि आदिवासियों का ये पलायन रुक सके। अब सवाल यह उठता है कि क्या भजनलाल सरकार इस 5,900 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पर यू-टर्न लेगी? इस पर सरकार और राजकुमार रोत का आगे का क्या कदम होगा ये राजस्थान के भविष्य के लिए काफी अहम होने वाला है।
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