आखिर क्यों जनप्रतिनिधियों से उलझ रहे हैं अफसर, रितु बनावत के मामले में तुरंत कार्रवाई, फिर भी सवाल गंभीर

Ritu Banawat Bayana EO Controversy: “तूने मेरे भतीजे को बाहर कैसे निकाला? वो मेरे परिवार का है!" ज़रा सोचिए, एक सरकारी बैठक में जहां जनता के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, वहां एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी के ये बोल हैं। वो भी किसी आम इंसान से नहीं, बल्कि इलाके की चुनी हुई विधायक से। भरतपुर जिले के बयाना से बीते दिन जो तस्वीर सामने आई। वो सिर्फ एक खबर या मामला नहीं बल्कि एक ऐसी गंभीर चिंता पैदा कर रही है जो फिर ये सोचने पर मजबूर कर रही है कि आखिर अफसरों को हो क्या गया है कि जिससे वो जनप्रतिनिधियों के साथ इस तरह का बर्ताव कर रहे हैं। आखिर ऐसा क्या कारण है कि अफसरों और मंत्रियों-विधायकों के बीच तालमेल का इतना अभाव हो रहा है कि सीधे मुंह ढंग से बातचीत भी नहीं हो रही है।
भरी मीटिंग में विधायक से तू-तड़ाक की भाषा का इस्तेमाल कर बैठीं EO साहिबा
बीते दिन बयाना नगर पालिका की एग्जीक्यूटिव ऑफिसर यानी EO अनीता कुशवाह और यहां की निर्दलीय महिला विधायक ऋतु बनावत के बीच तीखी बहस हो गई। बात सिर्फ बहस तक नहीं रही, बल्कि मैडम EO ने भरी बैठक में विधायक के साथ 'तू-तड़ाक' की भाषा का इस्तेमाल किया और खुलेआम धमकी दे डाली। अब इस पूरे वाकये का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है।
बयाना विधायक ऋतु बनावत से कथित बदसलूकी पर कार्रवाई
बयाना नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी अनीता कुशवाह को निलंबित कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, विधायक ऋतु बनावत ने नगर पालिका में बैठक के दौरान सफाई के टेंडर बार-बार एक ही कंपनी को दिए जाने और सफाई व्यवस्था में खामियों को लेकर… pic.twitter.com/fmEYRinZwP
— VIJAY KUMAR (@vijaykumarbmr) June 13, 2026
भतीजे को बाहर जाने को कहा तो गरम हो गईं EO अनीता
दरअसल, बयाना में विधायक ऋतु बनावत नगर पालिका की बैठक ले रही थीं। उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि साफ-सफाई के टेंडर आखिर एक ही फर्म को क्यों दिए जा रहे हैं? विधायक का ये सवाल पूछना था कि वहां मौजूद EO अनीता कुशवाह का भतीजा नवीन कुशवाहा बीच में बोलने लगा। चूंकि ये एक सरकारी बैठक थी, इसलिए विधायक ने मर्यादा का ध्यान रखते हुए उस बाहरी युवक को कमरे से बाहर जाने को कह दिया। बस, यही बात मैडम EO को चुभ गई। उनका पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया और वो अपनी प्रशासनिक गरिमा भूलकर विधायक से भिड़ गईं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे वो उंगली दिखाकर विधायक को तू-तड़ाक की भाषा की इस्तेमाल करने धमका रही है।
मामले के 6 घंटे बाद ही सस्पेंड हुई EO
जैसे ही ये वीडियो वायरल हुआ, विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका मिल गया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सीधे सरकार और कानून व्यवस्था पर सवाल दाग दिए। चौतरफा घिरती सरकार ने भी इस बार देरी नहीं की और महज 6 घंटे के भीतर बड़ा एक्शन लेते हुए EO अनीता कुशवाह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया।
बयाना के मामले में सरकार ने त्वरित कार्रवाई करके यह साफ संदेश देने की कोशिश की है कि जनप्रतिनिधियों का अपमान बर्दाश्त नहीं होगा। लेकिन यहां एक बड़ा सवाल खड़ा होता है। जब एक चुनी हुई विधायक के साथ सरकारी दफ्तर में इस तरह का 'तू-तड़ाक' वाला व्यवहार हो सकता है तो आम जनता के साथ ये अधिकारी कैसा बर्ताव करते होंगे?
अफसरशाही के खिलाफ एक दर्जन से ज्यादा मामले
वहीं जनप्रतिनिधि वर्सेज अफसर के एक दर्जन से भी ज्यादा मामले सामने आ गए हैं। सीएम ऑफिस तक ऐसे 20 से ज्यादा मामले अब तक पहुंच चुके हैं। उदयपुर सांसद मन्ना लाल रावत ने भी CM को शिकायत भेजी। लेकिन एक्शन अभी भी जीरो। वहीं श्रीगंगानगर में 15 नवम्बर को विधायक जयदीप बिहाणी से SDM सुभाष चंद्र और कलेक्टर मंजू का भी विवाद हो गया था। वहीं अगला मामला तो 23 दिसंबर का ही है। जहां सीकर जिले के प्रभारी और वनमंत्री संजय शर्मा से जिला कलेक्टर मुकल शर्मा की बहस हो गई थी। फिर ये शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंचा दी। गजेंद्र शेखावत वर्सेज IPS नारायण टोगस के मामले ने तो खूब सुर्खियां बटोरी हैं।
इन मामलों से जनता के बीच सरकार की छवि खराब हो रही है कि सरकार ब्यूरोक्रेसी को कंट्रोल ही नहीं कर पा रही है। जब अधिकारी जनप्रतिधियों से इस तरह का बर्ताव करते हैं तो, बेचारी जनता के साथ तो क्या करते होंगे, क्योंकि गाहे-बगाहे जनता के काम तो अधिकारी को ही करने होते हैं। इसका सीधा असर सरकार की तरफ से जनता के लिए किए जा रहे कामों पर पड़ता है। देखना ये है कि आखिर कब ब्यूरोक्रेसी की ये हालत सुधरती है।
ये भी पढ़ें- भारत रफ्तार के स्टिंग ऑपरेशन का असर, नगर निगम ने सीज़ किया फेमस बार 'द बॉस'
इस लिंक को शेयर करें

