होम/rajasthan/rss-mohan-bhagwat-on-maharana-pratap-486-birthday-haldighati-program

महाराणा प्रताप आज भी जीवित, जितनी बार युद्ध होगा उतनी बार जीतेंगे- हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतुशती समारोह में बोले मोहन भागवत

महाराणा प्रताप आज भी जीवित, जितनी बार युद्ध होगा उतनी बार जीतेंगे- हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतुशती समारोह में बोले मोहन भागवत
राजस्थान
17 Jun 2026, 12:34 pm
रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

Udaipur: वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप की आज 486वीं जन्मजयंती है। साथ ही हल्दीघाटी के युद्ध को 450 साल पूरे हुए हैं। इस मौके पर उदयपुर स्थित प्रताप गौरव केंद्रस राष्ट्रीय तीर्थ की तरफ से सार्द्ध चतुःशती समारोह का आयोजन हुआ। जिसमें मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत रहे। उन्होंने महाराणा प्रताप की उन अनसुने किस्सों को साझा किया जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। साथ ही ये भी बताया कि इतिहासकारों ने तब एक झूठ लिखा, एक नैरेटिल सेट किया ताकि आने वाले समय़ में राष्ट्रवादिता को कमजोर किया जा सके।

अकबर क्यों नहीं जीत पाया महाराणा प्रताप से

मोहन भागवत ने कहा कि अकबर महाराणा प्रताप को हराने के लिए आया था। अकबर ने भी यही फैलाया कि मेवाड़ और हल्दी घाटी का युद्ध हमने जीता और यही इतिहासकारों ने लिखा। हल्दीघाटी का युद्ध महज लड़ाई नहीं थी बल्कि भारत की आत्मा को बचाने का युद्ध था। उस लड़ाई ने ये तय कर दिया कि विदेशी आक्रमण भारत को झुका नहीं सकता। हम भारतवासी यहां पहले से हैं और बाद में भी रहेंगे। ये ऐसा युद्ध था।

झांसी की रानी की मृत्यु के बाद बाबू कुंवर सिंह अपने राज्य जगदीशपुर को वापस ले लिया। अंग्रेजों ने उन पर हमले किए। जो राणा प्रताप ने हल्दीघाटी के युद्ध में जिस तंत्र का इस्तेमाल किया वही उन्होंने किया। वे भागते इसलिए थे कि अंग्रेज उनके पीछे आए और पहले से ही घात लगाए बैठे उनके सैनिक इन अंग्रेजों को मार देते थे।

अंग्रेजी की रिपोर्ट क्या है कि हम आए तो बाबू कुंवर सिंह भाग गए, हमें घोड़ा मिला जिसे हमने ले लिया, बाबू कुंवर सिंह हार गए। ऐसे ही उस समय इतिहासकारों ने किया अगर नहीं किया तो आज कर रहे हैं।

मोहन भागवत बोले कि 77 साल में जिसने देश के देश उजाड़ दिए वो आंधी यहां आई, टकराई लेकिन बप्पा रावलस ललितादित्य ऐसे लोगों के प्रतिकार के चलते ये आँधी भाग गई फिर 200 साल तक भारत में पैर रखने की हिम्म्त नहीं हुई। पृथ्वी राज चौहान कपट युद्ध में हार गए, राणा सांगा की हार हुई। हिंदू समाज ये समझने लगा कि क्या हमारा कुछ नहीं बचा, क्या हमें अपनी संस्कृति, धर्म छोड़नी पड़ेगी, ऐसा कभी नहीं होगा, ये बताया हल्दीघाटी के युद्ध में।

ऐसी आंधी भारत में कई बार आई और लोगों को लगा भी होगा कि अब सब खत्म लेकिन ऐसा नहीं है। वो हस्ती हमारी पूरे रणावेश के साथ उस समय हल्दीघाटी के मैदान में प्रकट हुई। पास के मैदान को रक्त तलाई बना दिया। ये हमारा पराक्रम है।

मेवाड़ की आजादी पर आंच लगाने की हिम्मत किसी नहीं

कंप्यूटर में डाटा डालते तो अकबर को ही जीतना था लेकिन नहीं जीता। ऐसा क्या था जो वो नहीं जीता। महाराणा प्रताप ने उन्हे रोक दिया। इसके बाद कभी मेवाड़ की आजादी पर आंच लगाने की हिम्मत नहीं हुई। केवल राणा प्रताप नहीं लड़े, केवल उनकी सेना, राजवंश नहीं बल्कि पूरा समाज लड़ा। सारे भेद-भाव, धर्म जाति तोड़कर लड़ा। समाज की ये एकता कैसे बनी। क्योंकि ये स्व की रक्षा के लिए था। हार जीत से लेना-देना नहीं था। हार-जीत तो परिणाम की बात है, हम एक ही नतीजा जानते हैं कि भगवान ने जैसा जन्म, देश, समाज, धर्म, संस्कृति दी है उसके ही साथ जिएंगे और मरेंगे, ये उनका संकल्प था। भारत का जीवन को तरीका है कि हम सबको अपना मानते हैं। एक होने के लिए एक जैसा होने की जरूरत नहीं है, मन में एकता चाहिए।

हेडगेवार कहते थे कि मन में नजदीकी है तो ये दूरिया रहती नहीं है। ये भारतवर्ष है। इसलिए हमने सबको ज्ञान दिया। सबको सुशिक्षा दी। दूसरे देशों में जाकर हमने दोस्ती की। अच्छी बातों को पूरी दुनिया में फैलाया। दुनिया में एक नई बात निकली कि हम ही सही बाकी सब गलत। जिन्होंने ये पाला उन्होंने सारी दुनिया में आग लगाई। ऐसी आंधी भारत की तरफ दौड़ी। और यहां पर हम ही सही बाकी सब गलत को स्थापित कर दिया। सत्ता के लिए लड़ाई हुई। लड़ाई करने के बाद पूरा बदलने का हमें प्रयास किया गया। सबसे कीमती धन को लूटने की कोशिश की गई। इतिहास में कई उतार-चढ़ाव आए। हमारी हालत भी खराब हुई। तुलसीदास ने भी बताया कि आक्रमण के दौरान देश की क्या हालत थी। लेकिन सब कुछ खोकर हमने एक चीज नहीं खोने दी, वो है हमारी संस्कृति, एकता।

बॉर्डर पर भी जब लड़ाई होती है तो पूरा देश एक हो जाता है। यानी बाहर दुश्मन हैं तब ही हम एक होते हैं। तो फिर जब सब कुछ ठीक है तब भी एकता रहनी चाहिए ना। राजस्थान में रहने वाले समाज को प्रत्यक्ष लड़ना पड़ा। बाकी भारत राह देख रहा था। वहां जाना था मदद करने के लिए लेकिन उस समय ऐसा नहीं था। लोगों को पता ही नहीं था. महाराणा प्रताप अकेले ही खड़े रहे। इसलिए जीतेंगे तो जीतेंगे मरे तो स्वर्ग पाएंगे। महाराणा प्रताप एक बार हो गए वो अभी भी जीवित हैं। प्रयास करके उन्हें जीवन में लाना चाहिए। उनका शौर्य, पराक्रम, चारित्य, शीलवान से सीखना चाहिए। जीवन में उतारना चाहिए।

उस तंत्र के उपयोग से उन्हें पूर्ण जीत मिली। सेना सुरक्षित हो गई। सारे मुगलों के आक्रांत किए गए स्थानों को उन्होंने छुड़वाया। फिर से सुशासन स्थापित किया। महाराणा प्रताप की जयंती मनाते हैं दुनिया में कहीं सुना है कि अकबर की जयंती मनाते हैं। तो जीता कौन। ये भ्रम उत्पन्न किया जाता है। साफ है कि हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप जीते। वो कैसे जीते ये सोचना चाहिए। जो अकबर के पास नहीं था वो महाराणा प्रताप के पास था। वे सूर्यवंशी थे। श्रीराम जी ने कहा था कि ये सद्गुण मेरे हैं ,ये मेरा रथ बने हैं। राणा प्रताप भी य़ही कहते थे कि हमारे पास धर्म है, सत्य है। हम कभी गुलाम नहीं थे। चाणक्य ने कहा था कि अनपढ़ आदमी भी इसे जानता। हम सुसंस्कृत हैं , हम कभी गुलाम नहीं बनते।

जब दुश्मन बाहर तब ही क्यों एकता?

1000 सालों में बहुत आक्रमण हुए। भारत में बादशाह बनने के बाद एक दिन भी चैन की नींद नहीं सो सके क्योंकि हर दिन आजादी की लड़ाई की गतिविधि चल रही थी। राणा प्रताप ने पूरे हिंदू समाज को, आक्रांताओं को संदेश दिया कि तुम समझ रहे हो कि भारत झुक गया तो बता दूं भारत सबल है और तुम्हें भगा सकता है।

राणा प्रताप स्वभाव से विनम्र थे। गर्वीले नहीं थे। राज परिवार था लेकिन वो भारत का था। एक कवि ने कहा था कि कि सारी लड़ाई हो गई, पूरे युद्ध में अकबर गया। राणा सत्य, धर्म, संस्कृति के लिए लड़ रहे थे। अपने लिए नहीं बल्कि भारत के लिए लड़ रहे थे।

मोहन भागवत ने कहा कि राणा प्रताप का अभी तो पूरा अध्ययन बाकी है। चावण में बैठकर उन्होंने जो सुराज्य का अध्ययन किया उसे समझा और पढ़ा जाना चाहिए। वो सारी मूल बातें आज के राज्यकर्ताओं को समझना चाहिए। उन्होंने आगामी पीढ़ियों के लिए वो सारी बातें रखी हैं जो ये बताएं कि फिर से ऐसा समय आएगा तो क्या करना है।

आज की स्थिति में भारत में उत्थान से जिनके स्वार्थ के दुकान बंद होंगे ऐसे लोग भारत के खिलाफ काम कर रहे हैं, वो हमें झुकाने के लिए काम कर रहे हैं। जनबल, धन, संगठन सब उनके पास है। तो हमें समय राणा प्रताप की तरह खड़े रहना है। ऐसे ही सद्गुणों का आचरण करें। हमारे अभियान भारत को आगे बढ़ाने वाला हो। पूरा भारत एक है। दुनिया को धर्म देने वाला भारत खड़ा करना है। भारत का उत्थान होना जरूरी है। कैसे करना है वो हमें महाराणा प्रताप बता रहे हैं। जब तक ये हैं तब तक हल्दीघाटी का युद्ध जितने बार होगा उतनी बार हम जीतेंगे। ये विजय हमारी विजय नहीं है, ये दानवता पर मानवता की विजय है, अधर्म पर धर्म की विजय है। ॉ

ये भी पढ़ें- पाकिस्तान के लिए जासूसी करता था जोधपुर का युवक! अलवर में सैन्यकर्मियों के परिवार से बढ़ा रहा था नजदीकियां, जानें पूरा मामला


इस लिंक को शेयर करें

ads

लेटेस्ट खबरें

ads
© 2026 Bharat Raftar. All rights reserved. Powered By Zentek.