100 सीवर सफाई की गाड़ियों के टेंडर सिर्फ एक फर्म को, स्वायत्त शासन विभाग में ये क्या हो रहा है?

Nagaur: राजस्थान के स्वायत्त शासन विभाग के स्थानीय निकायों के लिए 100 सीवर सफाई वाहन खरीदने की प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। करीब 100 करोड़ रुपये के इस टेंडर में केवल एक कंपनी के भाग लेने से पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं वाहन की बाजार कीमत और प्रस्तावित खरीद दर में बड़े अंतर को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है।
जानकारी के मुताबिक विभाग ने 27 मार्च 2026 को 100 सीवर सफाई मशीनों और वाहनों की खरीद के लिए ऑनलाइन निविदा जारी की थी। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 98.96 करोड़ रुपये तय की गई थी। निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद केवल एक कंपनी ने इसमें भाग लिया और 98.73 करोड़ रुपये की वित्तीय बोली लगाई।
सिंगल बिडर के बावजूद खोली गई वित्तीय बोली
सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में आमतौर पर एक से ज्यादा कंपनियों की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाती है। लेकिन इस मामले में केवल एक कंपनी के आवेदन के बावजूद उसकी वित्तीय बोली खोल दी गई। अब विभाग की ओर से औपचारिक नेगोसिएशन की प्रक्रिया के बाद कार्यादेश जारी करने की तैयारी की जा रही है।

मामला मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के संज्ञान में भी पहुंच गया है। सूत्रों के मुताबिक CMO ने पूरी टेंडर प्रक्रिया की रिपोर्ट तलब की है और खरीद प्रक्रिया के कई पहलुओं की समीक्षा की जा रही है।
इसका सबूत भी सामने आया है। इसके टेंडर का नंबर, कंपनी का नाम, टेंडर जारी करने की तारीख भी सामने आई है। ये टेंडर फ्लूएंटग्रिड लिमिटेड नाम की कंपनी ने लिया है। 11 जून 2026 को दोपहर 2 बजकर 46 मिनट इसकी सबमिट डेट (जमा करने की तारीख) दिखाई जा रही है।
बाजार कीमत और टेंडर दर में बड़ा अंतर
विवाद की एक बड़ी वजह सीवर सफाई वाहनों की कीमत को लेकर भी सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि बाजार में ऐसे वाहनों की कीमत लगभग 60 से 65 लाख रुपये प्रति वाहन है, जबकि विभाग करीब 98.73 लाख रुपये प्रति वाहन की दर से खरीद की तैयारी कर रहा है।
अगर ये खरीद इसी दर पर होती है तो प्रति वाहन 35 से 38 लाख रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है। ऐसे में कुल खरीद में करोड़ों रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
क्यों उठ रहे हैं सवाल?
जानकारों का कहना है कि जब किसी बड़े सरकारी टेंडर में केवल एक ही कंपनी भाग लेती है तो कॉम्पटीशन खत्म हो जाती है। ऐसी स्थिति में आमतौर पर निविदा की शर्तों की समीक्षा कर दोबारा टेंडर जारी करने पर विचार किया जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा कंपनियां भाग ले सकें और सरकार को बेहतर दर मिल सके।
विभाग ने दी सफाई
स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक प्रतीक चंद्रशेखर ने कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपने हितों के लिए मामले को गलत तरीके से प्रचारित कर रहे हैं। विभाग की तरफ से अभी तक कोई कार्यादेश जारी नहीं किया गया है और अंतिम निर्णय सरकार स्तर पर लिया जाना है।
अब सभी की निगाहें सरकार और CMO की समीक्षा पर टिकी हैं कि इस टेंडर को मंजूरी मिलती है या फिर प्रक्रिया की दोबारा जांच कर नया टेंडर जारी किया जाता है।
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