समलेटी बमकांड: 14 लोगों की मौत के मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद की फांसी की सजा रद्द, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

प्रदेश के बहुचर्चित समलेटी बस बम कांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 14 लोगों की मौत के मुख्य आरोपी की फांसी की सजा को रद्द कर दिया है और इसी मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे एक और आरोपी सलीम उर्फ पप्पू को कोर्ट ने बरी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार की तरफ से दायर की गई स्थायी पैरोल को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज ही कर दिया।
क्यों दिया सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश?
सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल, जस्टिस संदीप मेहता ने मुख्य आरोपी डॉक्टर अब्दुल हमीद को फांसी की सजा को रद्द किया। ये सजा राजस्थान हाईकोर्ट ने 2019 में बरकरार रखी थी। लेकिन अदालत ने ये माना कि इस केस ट्रायल में कई खामियां आईं। इसमें आरोपी को कोई कानूनी सहायता नहीं मिली, इससे मामले में निष्पक्षता ही नहीं आई। इसलिए दोबारा नए सिरे से ट्रायल चले। सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश दिया है कि अब राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इस केस को दोबारा ट्रायल के लिए एक स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट को नामिल करेंगे। एक साल के भीतर ये सुनवनाई पूरी होनी चाहिए।
1996 में सरकारी रोडवेज बस में किया था बम विस्फोट
दौसा जिले के महवा थाना इलाके में 22 मई 1996 में ये बम धमाका हुआ था। आगरा से बीकानेर जा रही सरकारी रोडवेज बस में 50 से ज्यादा लोग सवार थे। शाम 4 बजे बस में अचानक भीषण धमाका हुआ। जैसे ही ये विस्फोट हुआ आस-पास के लोग या गांव छोड़िए, राजस्थान से लेकर पूरी दिल्ली हिल गई थी। क्योंकि ये धमाका दिल्ली के लाजपत नगर बम धमाके के ठीक एक दिन बाद ही हुआ था। इस बस धमाके में 14 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं 37 यात्री घायल हो गए थे।
इस बम धमाके की जांच CB-CID ने की थी। इनकी चार्जशीट के आधार पर डॉक्टर अब्दुल हमीद को 2014 में बांदीकुई की विशेष अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। 7 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। 2019 में राजस्थान हाईकोर्ट ने 6 आरोपियों को बरी कर दिया था लेकिन हमीद की फांसी को बरकरार रखा था।
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