World Elder Abuse Awareness Day 2026: जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों पर, 78% वरिष्ठ नागरिक आपदा से प्रभावित

Jaipur: विश्व वृद्ध दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस (World Elder Abuse Awareness Day 2026) के मौके पर पर हेल्पएज इंडिया और सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन की तरफ से सोमवार को मानसरोवर स्थित सेक्टर-10 कम्युनिटी सेंटर में एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय था— "जलवायु अनुकूल वृद्धावस्था: देखभाल, गरिमा एवं स्वायत्तता सुनिश्चित करना"। इस दौरान हेल्पएज इंडिया ने अपनी राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट जारी की और जलवायु परिवर्तन के बुजुर्गों पर पड़ रहे प्रभावों को लेकर विशेषज्ञों के साथ चर्चा का आयोजन किया।
कार्यक्रम में हेल्पएज इंडिया की उपनिदेशक वंदना चौधरी, सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भाग लिया। परिचर्चा का संचालन शैलेश यादव ने किया। कार्यक्रम में करीब 100 प्रतिभागी शामिल हुए।
10 राज्यों के 2,224 बुजुर्गों पर किया गया अध्ययन
हेल्पएज इंडिया की तरफ से जारी राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट में देश के 10 राज्यों के 20 जिलों के 2,224 वरिष्ठ नागरिकों को शामिल किया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि जलवायु परिवर्तन का असर ग्रामीण भारत के बुजुर्गों पर तेजी से बढ़ रहा है और आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के वरिष्ठ नागरिक सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
78 फीसदी बुजुर्ग किसी न किसी जलवायु आपदा से प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन सालों में 78 प्रतिशत वरिष्ठ नागरिक किसी न किसी जलवायु आपदा का सामना कर चुके हैं। इनमें हीटवेव सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरी है, जिससे 45 प्रतिशत बुजुर्ग प्रभावित हुए। इसके अलावा 27 प्रतिशत बुजुर्ग बाढ़ और 20 प्रतिशत सूखे की मार झेल चुके हैं।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिक, विधवाएं, 80 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग और शारीरिक या मानसिक चुनौतियों से जूझ रहे लोग जलवायु आपदाओं के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं।
विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार
परिचर्चा में राजस्थान विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सुशीला पारीक, दैनिक भास्कर के विशेष संवाददाता शैलेन्द्र शर्मा, अर्थ एसोसिएशन की निदेशक हेमलता शर्मा, राजस्थान सरकार के सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. यश दशोरा और ग्रीन वर्ल्ड फाउंडेशन की प्रबंध निदेशक सीमा सैनी ने अपने विचार रखे।
वक्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि ये बुजुर्गों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और जीवन गुणवत्ता से भी सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा है। ऐसे में सरकारों और नीति निर्माताओं को वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों को स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और आपदा प्रबंधन नीतियों में प्राथमिकता देनी चाहिए।
गरिमा और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीने का अधिकार
विशेषज्ञों का कहना था कि बढ़ते तापमान, हीटवेव, बाढ़ और सूखे जैसी घटनाओं के बीच बुजुर्गों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना समय की जरूरत है। इसके लिए समुदाय, सरकार और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करना होगा, ताकि वरिष्ठ नागरिक गरिमा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जी सकें।
ये भी पढ़ें- 'राजस्थान और जोधपुर में पेयजल की दुर्दशा के लिए अशोक गहलोत जिम्मेदार', केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का पूर्व सीएम पर बड़ा हमला
इस लिंक को शेयर करें

