सुवेंदु अधिकारी, हिमंता बिस्वा..., लिस्ट लंबी है, क्या BJP पर अब गैर भाजपाइयों का कब्जा? अब तक 8 नेता बन चुके CM, जानें वजह

बीजेपी ने बंगाल चुनाव में जीत के बाद आज सीएम का ऐलान भी कर दिया। गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुई बैठक में सुवेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। सुवेंदु अधिकारी दिसंबर 2020 में टीएमसी छोड़कर बीजेपी में आए थे। उनके बीजेपी में आने के बाद ही तय हो गया था कि प्रदेश में टीएमसी सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। पूरे 5 साल संघर्ष के बाद बीजेपी अब 2026 में सरकार बनाने जा रही है तो जीत का सेहरा बांधा गया है सुवेंदु अधिकारी के माथे पर। आज पूरे देश में बीजेपी और एनडीए की राज्यों में सरकार है। देश की लगभग 78 प्रतिशत आबादी पर अब बीजेपी और एनडीए का राज स्थापित हो गया है।
इस बीच एक नई बहस छिड़ गई है क्या बीजेपी में अब गैर भाजपाइयों का कब्जा हो गया है? क्योंकि दूसरी पार्टी से बीजेपी में आकर अब तक 8 नेता ऐसे हैं जो सीएम बन गए हैं या फिलहाल सीएम के पद पर हैं। इससे खांटी संघी और बीजेपी के पुराने नेताओं में नाराजगी देखी जा रही है। हालांकि ये और बात है कि वे खुलकर विरोध में नहीं आते हैं। ऐसे में अब बड़ सवाल यह है कि उन नेताओं का क्या जो जनसंघ के समय या बीजेपी की स्थापना के समय से ही पार्टी से जुड़े हैं और कई बार विधायक-मंत्री और सांसद रह लिए लेकिन सीएम के प्रबल दावेदार होने के बावजूद उन्हें कुर्सी नहीं मिली। ऐसे में आइये जानते हैं ऐसे नेताओं के नाम जोकि पहले दूसरी पार्टी में थे लेकिन अब बीजेपी में जाकर सीएम की कुर्सी तक पहुंच गए हैं।
1. माणिक साहा- माणिक साहा वर्तमान में त्रिपुरा में बीजेपी के सीएम हैं। माणिक साहा बीजेपी में आने से पहले कांग्रेस में थे। वे 2016 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए। इसके बाद पार्टी ने उनको 2020 में अध्यक्ष बनाया और राज्यसभा भेजा। इसके बाद 2022 में उनको आलाकमान ने बिप्लव कुमार देव की जगह पर सीएम बना दिया। 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद वे एक बार फिर प्रदेश के सीएम बने। इससे पहले बिप्लव कुमार देव त्रिपुरा में बीजेपी के पहले सीएम थे। वे बीजेपी मूल के ही थे।
2. पेमा खांडू- पेमा खांडू लगातार तीन बार से अरुणाचल प्रदेश के सीएम हैं। इससे पहले वे कांग्रेस में थे। खांडू ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से 2005 से की थी। उनके पिता अरुणाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार में मंत्री थे। पिता के निधन के बाद वे खाली हुई सीट पर हुए उपचुनाव में जीते और फिर मंत्री भी बने। 2016 में उन्हें कांग्रेस विधानमंडल दल का नेता चुना गया। वे पहली बार सीएम बने। 16 सितंबर 2016 को खांडू अपने साथी 43 विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़कर पीपुल्स पार्टी आॅफ अरुणाचल में शामिल हो गए। जब पीपुल्स पार्टी ने खांडू की जगह ताकाम पारियो को सीएम के लिए नामित किया तो खांडू अपने सहयोगी 33 विधायकों के साथ बीजेपी में शामिल हो गए। तब से लेकर लगातार खांडू बीजेपी की ओर से सीएम हैं।
3. एन बीरेन सिंह- बीरेन सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत डेमोक्रेटिक पीपुल्स पार्टी से की। इसके बाद वे एमएलए बने। 2004 से पहले इस पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया। इसके बाद वे कांग्रेस की सरकार में लगातार मंत्री रहे। 2012 में जब उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया तो वे 2016 में कांग्रेस से नाराज होकर बीजेपी में चले गए। बीजेपी ने मणिपुर में पहली बार 2017 में सरकार बनाई। जिसके मुखिया एन बीरेन सिंह थे। 2022 में फिर से बीजेपी की सरकार बनी लेकिन राज्य में हिंसा के बाद उन्होंने फरवरी 2025 में इस्तीफा दे दिया।
4. बसवराज बोम्मई- बोम्मई ने 1992 में जनता दल से राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। 1994 में वे चुनाव भी लड़े लेकिन बीजेपी के जगदीश शेट्टार से चुनाव हार गए। इसके बाद 1998 में जेडीयू से धारवाड़ स्थानीय निकाय क्षेत्र से एमएलसी बने। हालांकि 2008 में वे जेडीयू छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। 2008 से 2013 तक वे बीजेपी सरकार में मंत्री रहे। इसके बाद वे बीजेपी ने उनको प्रदेश का गृहमंत्री भी बनाया। बोम्मई 27 जुलाई 2021 को पहली बार प्रदेश के सीएम बने। लेकिन मई 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार मिली।
5. सर्वानंद सोनवाल- सर्वानंद सोनोवाल असम में बीजेपी के पहले सीएम बने। बीजेपी में आने से पहले वे असम गण परिषद में थे। जहां से उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। 2001 में वे एजीपी से एमएलए बने। इसके बाद 2004 में पहली बार लोकसभा पहुंचे। 2011 में वे एजीपी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। 2014 में केंद्र में बनी बीजेपी सरकार में वे मंत्री बने। इसके बाद 2016 में वे प्रदेश में बीजेपी के पहले सीएम बने।
6. हिमंता बिस्वा सरमा- हिमंता बिस्वा सरमा असम के निवर्तमान सीएम हैं। संभावना है कि वे दूसरी बार प्रदेश के सीएम बनेंगे। सरमा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से की। वे 2001 में पहली बार एमएलए बने। इसके बाद वे लगातार तीन बार कांग्रेस से एमएलए रहे। राहुल गांधी से नाराज होकर उन्होंने 2015 में कांग्रेस छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गए। 2016 में बीजेपी की पहली बार जब प्रदेश में सरकार बनी तो वे मंत्री बने। 2021 के विधानसभा चुनाव में जब बीजेपी दूसरी बार चुनाव जीती तो उन्हें बीजेपी आलाकमान ने सोनोवाल की जगह उन्हें सीएम बनाया। अब उनके लगातार दूसरी बार सीएम बनने की संभावना है।
7. सम्राट चौधरी- सम्राट चौधरी के पिता शुकनी चौधरी आरजेडी के संस्थापक सदस्यों में से थे। वे कई बार सांसद और लालू यादव की सरकार में मंत्री रहे। इससे पहले शकुनी चौधरी समता दल में थे। 1999 में जब लालू यादव ने आरजेडी बनाई तो शकुनी भी उसमें शामिल हो गए। 1999 में राबड़ी देवी की सरकार में सम्राट चौधरी मंत्री बने। हालांकि उम्र संबंधी विवाद के कारण बाद में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद साल 2000 में वे पहली बार विधायक बने। उनकी उम्र को लेकर बीजेपी नेता सुशील मोदी ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी जिसके बाद कोर्ट ने उनको अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद 2004 में हुए उपचुनाव में वे हार गए। वे पहली बार 2010 में विधायक बने। हालांकि कुछ समय बाद वे जेडीयू में शामिल हो गए। 2014 में नीतीश के इस्तीफे के बाद वे जीतनराम मांझी की सरकार में मंत्री बने। 2014 से 2016 और 2020 से 2025 तक बिहार के एमएलसी रहे। 2017 में बीजेपी में शामिल हुए। 2021 में नीतीश सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया। 2023 में वे बीजेपी के अध्यक्ष बने। अब बीजेपी ने 15 अप्रैल 2026 को उन्हें प्रदेश का सीएम बना दिया है।
8. सुवेंदु अधिकारी- सुवेंदु अधिकारी बंगाल में बीजेपी के पहले सीएम हैं। उन्होंने अपने पाॅलिटिकल करियर की शुरुआत टीएमसी से की। इसके बाद जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर टीएमसी बनाई तो वे भी इसमें शामिल हो गए। 2007 में नंदीग्राम आंदोलन से उनको पहचान मिली। 2011 में टीएमसी की जब पहली बार सरकार बनी तो वे भी मंत्री बने। इसके बाद दिसंबर 2020 में वे टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। 2021 में वे नेता विपक्ष बने। अब 2026 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बहुमत मिलने के बाद वे पहली बार सीएम बनने जा रहे हैं।
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