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भारत से रिश्ते तोड़ने पर क्यों उतारू हो रहे हैं ट्रंप? आखिर क्या है इंडिया को नरक बताने के पीछे का माइंडसेट

भारत से रिश्ते तोड़ने पर क्यों उतारू हो रहे हैं ट्रंप? आखिर क्या है इंडिया को नरक बताने के पीछे का माइंडसेट
अंतरराष्ट्रीय
24 Apr 2026, 11:06 am
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

India USA Relations: भारत और अमेरिका के रिश्ते अब तक के सबसे अच्छे दौर में थे लेकिन अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने कड़वे बयानों से रिश्तों में खटास ला रहे हैं। चाहे वो रेसिप्रोकल टैरिफ की बात हो, जबरन भारत के मामलों में घुसने की बात हो, पाकिस्तान से युद्ध में मध्यस्थता कर शांति लाने की बात हो और अब तो उन्होंने हद ही पार कर दी। उन्होंने भारत को सीधे-सीधे नरक बोल दिया (Donald Trump remark on India) और जब उन्हें इस बात का अंदाजा हुआ कि वाकई में वो बहुत गलत बोल गए हैं जिससे चौतरफा उनकी आलोचना हो रही है, तब उनकी तरफ से अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता क्रिस्टोफर एलम्स ने इसका बचाव किया और भारत को महान देश बता दिया था। भारत की तरफ से इस पर आपत्ति दर्ज की गई है।

ट्रंप ने भारत-चीन को नर्क क्यों कहा?

दरअसल डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट किया था जो एक रेडियो पॉडकास्ट का था। इसमें भारत और चीन के लिए काफी आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। इसी पोस्ट में भारत को हेल होल यानी नरक कहा गया था। उन्होंने कहा था कि अमेरिका में तकनीकी क्षेत्रों में भारतीयों का ही वर्चस्व है। वे ही हर जगह हैं। इतना ही नहीं इस पोस्ट में उन्होंने भारतीय और चीनी प्रवासियों को लैपॉप वाले गुंडे तक कहा है और कहा कि इन्होंने हमारे झंडे पर पांव रखा।

ये भारतीय और चीनी अमेरिका में सिर्फ बच्चा पैदा करने आते हैं ताकि वो अमेरिकी नागरिक बन जाए। ये जन्मसिद्ध नागरिकता का अधिकार अब खत्म करना होगा। यहां एक नवजात बच्चा तुरंत अमेरिका का नागरिक बन जाता है। वे फिर वे अपनी पूरी फैमिली को चीन, भारत या धरती के किसी नरक के गड्ढे (देश) से अमेरिका में ले आते हैं।

बचाव में क्या बोला अमेरिका

राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान के बाद अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता क्रिस्टोफर एलम्स ने बयान जारी किया और कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत को एक महान देश मानते हैं। पीएम मोदी उनके बहुत अच्छे दोस्त हैं।

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भारत ने कहा- बिना ज्ञान के बयान दे रहे

भारत ने इसे लेकर अमेरिका पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। गुरुवार देर शाम विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि अमेरिका का वो बयान उन्होंने देखा है और फिर अमेरिका दूतावास की रिएक्शन भी देखा। ये जो भी बात कही गई है वो बिना जानकारी की हैं और अनुचित हैं। ये भारत अमेरिका रिश्तों की असलियत नहीं है। जो लंबे वक्त से सम्मान और साझा हितों पर आधारित हैं।

क्या भारत से अच्छे रिश्ते नहीं चाहते हैं ट्रंप

विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप एक बिजनेस ऑरिएंटेज माइंडसेट वाले नेता हैं। वो जो कुछ भी करते हैं। उसमें वो अपना फायदा ही ढूंढते हैं। भारत और चीन पर वो लगातार इस तरह के जो बयान दे रहे हैं वो उनकी हताशा और भड़ास है। क्योंकि वो जो अमेरिका फर्स्ट नीति को जो लेकर चल रहे हैं। उसके आड़े में एशिया के यही दो ताकतवर देश आ रहे हैं। चीन से ट्रेड वॉर के चलते वो भारत को तो अपने पक्ष में करने के लिए साधना चाहते हैं लेकिन भारत के अपने हित हैं, वो कभी पिछलग्गू नहीं रहा। अपनी सोच स्ट्रेट फॉरवर्ड रखता है। व्यापार की बात होतो रूस और ईरान से भी व्यापार करता है जबकि ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ की धमकी भी दी थी और भारत नहीं माना तो 50 प्रतिशत टैरिफ थोप भी दिया था। हालांकि इसे बाद में हटा भी दिया।

दूसरी तरफ भारत भी अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अच्छी तरह समझ गया है इसलिए वो रूस और चीन के साथ अमेरिका से निपटने के लिए एक साथ आना चाहते हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर। भारत-चीन-रूस की तिगड़ी से ट्रंप तमतमाए हुए हैं, इसीलिए इस तरह के अनर्गल बयानों से अपनी भड़ास निकालते रहते हैं।

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