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हनुमान बेनीवाल की भजनलाल सरकार को एक और चुनौती! कोटपुतली में अवैध खनन गोलीबारी का गर्माया मुद्दा

हनुमान बेनीवाल की भजनलाल सरकार को एक और चुनौती! कोटपुतली में अवैध खनन गोलीबारी का गर्माया मुद्दा
राजस्थान
02 Jun 2026, 03:17 pm
रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

Kotputali Firing illegal mining case: बीते दिन कोटपुतली के अजीतपुरा-कुजोता इलाके में ग्रामीणों के धरने पर चली गोलीबारी का मामला अब पूरे राजस्थान को सुलगा रहा है। अवैध खनन के खिलाफ गांव वालों ने हिम्मत जुटाकर विरोध जताया तो बेखौफ माफियाओं ने उन्हें गोलियों से भून डाला। बीती रात गोलीबारी से घायल लोगों से मिलने RLP सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल SMS हॉस्पिटल पहुंचे तो उनका गुस्सा सरकार पर फूट पड़ा और कह दिया कि इतनी बड़ी घटना हो गई और सरकार को पता तक नहीं ऐसा तो हो नहीं सकता। बिना सत्ता में बैठे लोगों के संरक्षण के ये तो नामुमकिन है।

'रसूखदारों का गरीबों पर अत्याचार'

उन्होंने कहा कि जीतपुरा कलां में 100 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन पर फैली एक चूना पत्थर की खदान है, जो करीब 40 सालों से बंद पड़ी थी। उस समय, चूना पत्थर की खदानों की ज़्यादा कीमत नहीं थी, और ज़मीन बहुत कम कीमतों पर मिल जाती थी। रसूखदार लोगों ने ज़मीन खरीद ली और बाद में संसाधन निकालने के बाद कई खदानों को छोड़ दिया। अजीतपुरा कलां के ग्रामीण इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे थे। तीन दिन पहले, SDM ने उनके विरोध-प्रदर्शन के टेंट ज़ब्त कर लिए थे। आज टेंट वापस कर दिए गए, और जब ग्रामीण ज़मीन को समतल कर रहे थे, तो कथित तौर पर लाठीचार्ज और गोलीबारी हुई। चश्मदीदों और घायलों के मुताबिक, सात से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं। तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जबकि चार या पांच लोगों को भी चोटें आई हैं।

क्या है ये पूरा मामला?

दरअसल कोटपूतली-बहरोड़ जिले के अजीतपुरा-कुजेटा गांव के लोग लंबे समय से ये मांग उठा रहे थे कि उनके गांव के पास हो रहे कथित अवैध खनन और डीप होल ब्लास्टिंग को रोका जाए। इसे लेकर ग्रामीणों का आरोप है कि नेशनल लाइम स्टोन कंपनी आबादी क्षेत्र के पास खनन कर रही है। डीप होल ब्लास्टिंग की वजह से घरों में दरारें पड़ रही हैं, लोगों का जीना मुश्किल हो गया है और गांव की सुरक्षा खतरे में है। इसी के विरोध में पिछले 292 दिनों से ग्रामीण लगातार धरना दे रहे थे।

फिर 30 मई को प्रशासन ने मामले की सुध ली। ग्रामीणों का खनन बंद कराने का आश्वासन दिया गया, जिसके बाद धरना हटा दिया गया। लेकिन इसी दौरान धरना स्थल से टेंट और दूसरा सामान जब्त कर लिया गया, जिससे गांव वाले नाराज हो गए।

फिर 1 जून को यानी बीते सोमवार को ग्रामीणों ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और दोबारा धरना शुरू किया। इसी दौरान कुछ लोग गांव की श्मशान भूमि के पास मौजूद थे, तभी तीन बिना नंबर की कैंपर गाड़ियों में सवार हथियारबंद लोग वहां पहुंचे। उन्होंने आते ही फायरिंग शुरू कर दी। साथ ही पथराव भी किया। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागे, लेकिन तब तक कई लोग घायल हो चुके थे। इसमें कुल 10 लोग घायल हुए। इनमें से 3 लोगों को जयपुर के SMS अस्पताल रेफर किया गया है। बाकी का स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है। जब इस पूरे घटनाक्रम की खबर पुलिस को मिली तो SP सतवीर सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और जांच पड़ताल शुरू की।

शासन-प्रशासन पर बड़ा सवाल

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर ग्रामीणों के आरोप सही हैं तो आखिर हथियारबंद लोग वहां तक पहुंचे कैसे? बिना नंबर की गाड़ियों में आए लोगों ने खुलेआम फायरिंग की, तो सुरक्षा व्यवस्था कहां थी? क्या यह सिर्फ जमीन और खनन का विवाद है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है? और सबसे अहम सवाल, वो ये कि 292 दिनों तक चल रहे आंदोलन का समाधान आखिर प्रशासन क्यों नहीं निकाल पाया? सरकार की नजर क्या इस धरने पर या इस अवैध खनन के मुद्दे पर नहीं पड़ी? इन सवालों के जवाब अब पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से ही सामने आएंगे। फिलहाल अजीतपुरा-कुजेटा गांव में तनाव है। ग्रामीण न्याय की मांग कर रहे हैं और पूरा मामला अब राजस्थान की राजनीति से लेकर कानून-व्यवस्था तक बड़ा मुद्दा बन चुका है।

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