बेनीवाल के मचाए तहलके में कूदी कांग्रेस, संयम लोढ़ा खुलकर कर रहे हनुमान का समर्थन

RLP सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी से मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीजेपी ने बेनीवाल के खिलाफ मोर्चा तो खोल ही दिया है। लेकिन अब कांग्रेस भी इस बहती गंगा में धो रही है। कांग्रेस ने हनुमान बेनीवाल के मुख्यमंत्री को मूर्ख कहने की बात का समर्थन किया है।
संयम लोढ़ा ने कहा - क्या गलत है इसमें
कांग्रेस के कद्दावर नेता संयम लोढ़ा ने कहा कि बेनीवाल ने बीजेपी की राजस्थान सरकार को 'मूर्खों की जमात' कहा तो क्या गलत कहा? लोढ़ा ने पूरी लिस्ट गिना दी। कहा कि ढाई साल में सरकार ने सिवाय मूर्खता के किया क्या है? कॉलेज-यूनिवर्सिटी के चुनाव करा नहीं पाए, पंचायत और नगर पालिका के चुनाव टाले बैठे हैं, जैसलमेर में गायों की मौत हो रही है, और इनके मंत्री कभी कलेक्टर से लड़ते हैं तो कभी सेक्रेटरी से।
सचिन पायलट के खिलाफ बेनीवाल ने दिया था बयान
यहां ये बात गौर करने वाली है कि बेनीवाल के बयान का समर्थन जो कांग्रेस कर रही है। उसी कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट के लिए बेनीवाल ने कुछ ही दिन पहले कहा था कि वो 'अधरझूल' में हैं और बीजेपी के संपर्क में हैं। लेकिन लगता है कि इससे कांग्रेस को कुछ खास फर्क पड़ नहीं रहा है।
बेनीवाल ने अब बीजेपी नेताओं के पुराने बयान पोस्ट किए
बता दें कि बेनीवाल ने सीधे-सीधे राजस्थान की सरकार को कह दिया- "मूर्खों की जमात!" और मुख्यमंत्री को मूर्खाधिराज कह दिया था। इस पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा था कि ऐसे बयानों वाले नेताओं का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए, बेनीवाल का मानसिक संतुलन हिल गया है, उन्हें किसी अच्छे साइकोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए।
बीजेपी ने इस बयान पर अब हनुमान बेनीवाल ने बीजेपी के नेताओं के पुराने बयान निकाल-निकाल कर सोशल मीडिया पर पोस्ट करना शुरू कर दिया और पूछा कि सार्वजनिक जीवन की मर्यादा का पाठ पढ़ाने वाले बीजेपी नेताओं... आप ज़रा अपने पुराने वीडियो भी देखलो।
भैराणा धाम में महापंचायत के दौरान दिया था ये बयान
बता दें हनुमान बेनीवाल ने 27 मई को दूदू के भैराणा धाम में संतों की महापंचायत के दौरान ये सिसायी टिप्पणी की थी। बेनीवाल संतों की मांगों को लेकर यहां पहुंचे थे और सरकार-रीको से अपना प्रोजेक्ट वापस लेने की मांग कर रहे थे। आधी रात को जयपुर कूच के दौरान कमेटी बनाने की बात पर सहमति भी बन गई थी लेकिन लिखित में आदेश ना होने के चलते संतों ने फिर से विरोध शुरू कर दिया है। पूरी खबर यहां पढ़ें-
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