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NEET के जयपुर के आरोपियों को पूरा परिवार पेपर लीक में शामिल, अब एक-एक कर खुल रही कलई

NEET के जयपुर के आरोपियों को पूरा परिवार पेपर लीक में शामिल, अब एक-एक कर खुल रही कलई
जयपुर
15 May 2026, 01:09 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

क्या आपने कभी सुना है कि पूरा परिवार मिलकर 'डॉक्टर' बनने की फैक्ट्री खोल ले? लेकिन मेहनत से नहीं... चोरी और सेंधमारी से! जी हां, नीट पेपर लीक में जयपुर के जमवारामगढ़ के रहने वाले आरोपी मांगीलाल और दिनेश बिंवाल पर CBI की शुरूआती में जांच में सामने आया है कि आरोपियों को पूरा परिवार इस पेपर लीक मामले में शामिल था। आरोपियों ने अपने बच्चों के जरिए पेपर को लीक कराया।

जमवारामगढ़ के दोनों भाई-मांगीलाल और दिनेश बिंवाल ने अपने बेटों को पढ़ाई के लिए नहीं, बल्कि पेपर बेचने के लिए 'सेल्समैन' बना दिया। एक ऐसा नेटवर्क जहां बाप पेपर खरीदता था और बेटे सीकर की कोचिंग में बैठकर सौदेबाजी करते थे।

ये ये इस परिवार की पूरी कहानी

जांच एजेंसी SOG और CBI की रेड में जो सच निकला है, वो होश उड़ाने वाला है। इन भाइयों ने 26 अप्रैल को 30 लाख रुपए में पेपर खरीदा। लेकिन इसे निवेश की तरह इस्तेमाल किया। अगले ही दिन यानी 27 अप्रैल को इनके बेटों-विकास और एक नाबालिग-के पास पेपर पहुँच गया। सीकर की प्राइवेट कोचिंग CLC में पढ़ रहे इन बेटों ने अपने ही दोस्तों और जूनियर्स को शिकार बनाया। बकायदा एक सीक्रेट चैट ग्रुप बनाया गया। 150 छात्रों की लिस्ट तैयार हुई और रेट फिक्स हुआ-10 लाख रुपए! यानी 30 लाख का माल, करोड़ों में बेचने की तैयारी थी।

अब आप सोच रहे होंगे कि इन्हें इतनी हिम्मत कहाँ से आई? दरअसल, इसकी जड़ें 2025 की परीक्षा में हैं। CBI की जांच में खुलासा हुआ है कि पिछले साल विकास बिंवाल ने खुद 25 लाख में पेपर खरीदा था। जरा इन आंकड़ों पर गौर कीजिए विकास के 12वीं में सिर्फ 55% नंबर आए थे और नीट-24 में 270 नंबर आए थे, वो पेपर मिलते ही 95 परसेंटाइल ले आया!। इसी तरह इन पांचों भाई-बहन प्रगति, गुंजन, सानिया और पलक ने पिछले साल पेपर रटा और आज ये सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं।

दिनेश-मांगीलाल के बच्चे अपने पापा के राजनीति में होने के रौब जमाते

जो बच्चे क्लास टेस्ट में फेल हो रहे थे, वो पेपर लीक के दम पर देश के भविष्य के 'डॉक्टर' बन गए। इस बार इनका टारगेट छोटा भाई ऋषि था, जो 12वीं में ग्रेस मार्क्स से पास हुआ है, लेकिन उसे भी डॉक्टर बनाने की पूरी सेटिंग हो चुकी थी। इनका बिजनेस मॉडल सिर्फ पेपर देना नहीं था, बल्कि 'भरोसा' बेचना था। विकास और उसका भाई छात्रों को अपने पिता की बड़े मंत्रियों, विधायकों और अफसरों के साथ तस्वीरें दिखाते थे। वीडियो कॉल पर दिनेश बिंवाल अपने आलीशान फार्म हाउस और सड़कों पर लगे अपने पोस्टर दिखाकर गारंटी देता था कि-"पेपर यही आएगा, क्योंकि हमारी पहुँच ऊपर तक है।"

दीवार फांद आरोपियों के घर में घुसी CBI की टीम

लेकिन अब ये रसूख काम नहीं आ रहा। जयपुर कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड लेकर CBI इन पांचों को दिल्ली ले गई है। जमवारामगढ़ वाले घर पर जब CBI पहुँची, तो घरवालों ने दरवाजे बंद कर लिए जिसके बाद टीम दीवार फांदकर अंदर घुसी। लग्जरी गाड़ियाँ, संदिग्ध चेकबुक और एटीएम कार्ड बरामद हुए हैं-जो चीख-चीख कर काली कमाई की गवाही दे रहे हैं।

सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ बिंवाल परिवार की कहानी है? या ऐसे और भी 'यश यादव' और 'विकास' सिस्टम की जड़ों को खोखला कर रहे हैं? CBI अब इनके पुराने लिंक खंगाल रही है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में राजस्थान से लेकर दिल्ली तक कई और सफेदपोश चेहरे बेनकाब होंगे।

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