पंचायत चुनाव में देरी पर सरकार के दिए बहानों को हाईकोर्ट से मिली फटकार, फैसला रिजर्व

Rajasthan Panchayat Elections 2026: प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनावों की देरी पर राजस्थान हाईकोर्ट ने सोमवार को अहम सुनवाई की। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने सरकार और राज्य चुनाव आयोग की तरफ से मांगे गए अतिरिक्त समय पर सुनवाई पूरी करते हुए फैसला रिज़र्व कर लिया। अदालत ने तय समय पर चुनाव न कराने को लेकर नाराजगी जताई है।
सरकार के बेतुके तर्कों पर कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट (Rajasthan High court) में सुनवाई के दौरान पीठ ने सरकार से कहा कि “हम पहले ही पर्याप्त समय दे चुके हैं, लेकिन सरकार चुनाव को लगातार होल्ड कर रही है। ये रवैया ठीक नहीं है।” इस पर सरकार की तरफ से पेश हुए महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि निकाय चुनावों के वार्ड परिसीमन पर हाईकोर्ट के दो अलग-अलग आदेश आने से देरी हुई। सरकार ने जून में रेगिस्तानी क्षेत्रों में हीटवेव, जुलाई में बरसात के मौसम को भी चुनाव कराने के लिए चुनौतीपूर्ण स्थितियां बताया।
तो इस पर पीठ ने कड़े लहज़े में कहा कि “राजस्थान का आदमी गर्मी से बचाव करना जानता है।”
और “बारिश वो भी राजस्थान में?” साथ ही कहा कि “प्रचार और तैयारी के लिए उम्मीदवारों को पूरा समय मिलेगा।”
सरकार कराना ही नहीं चाहती पंचायत चुनाव
वहीं याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां की पैरवी करने वाले एडवोकेट पुनीत सिंघवी ने तर्क दिया कि सरकार चुनाव कराना ही चाहती। प्रदेश में संवैधानिक संकट पैदा हो गया है। साढ़े 11 हजार पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, अब संख्या बढ़कर 14 हजार हो गई है। ये भी कहा कि सरकार डेढ़ साल से चुनाव टाल रही है। वहीं एडवोकेट प्रेमचंद देवंदा ने भी पंचायत और चुनाव में देरी को गंभीर मुद्दा बताया।
ये भी पढ़ें- JJM घोटाले में महेश जोशी का करीबी गिरफ्तार, घोटाले में सबसे बड़ा हाथ
हाईकोर्ट के पूर्व आदेश
बता दें कि 14 नवंबर 2025 को अदालत ने 439 याचिकाओं पर फैसला देते हुए राज्य को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने का आदेश दिया था। परिसीमन प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक पूरी करने के निर्देश दिए गए थे। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी 15 अप्रैल तक चुनाव कराने की समयसीमा से सहमति जताई थी।
पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज देवंदा ने चुनाव आयोग के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है। इस पर 18 मई को सुनवाई होगी। पंचायत चुनाव में देरी के चलते क्या बताया गया? पीठ ने पूछा कि आदेश केवल निकायों को लेकर था, फिर पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए गए?
इस पर महाधिवक्ता ने कहा कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने के कारण पंचायत चुनाव संभव नहीं हो सके। सरकार ने 9 मई 2025 को ओबीसी आयोग का गठन किया था। आयोग समय-समय पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय मांगता रहा, जिसके चलते कार्यकाल बढ़ाना पड़ा।
ये भी पढ़ें- Hanumangarh: 16 साल के किशोर को पीटने वाले मामले में 5 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज, पिता बोले- गुंडे हैं सब
इस लिंक को शेयर करें

