मुस्लिम धर्म अपनाने के दबाव में हिंदू बच्चे ने दे दी जान, डरा-धमका कर खतना तक कराया, सचिन पायलट की चुप्पी पर आक्रोश

Tonk Kunal Gurjar Suicide: ऐसा लगता है कि जैसे टोंक जिले में अब सांप्रदायिक घटनाएं आम बात हो गई है। क्योंकि यहां से दो दिन पहले एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई। जिसे जिस किसी ने भी सुना, अंदर तक दहल गया। यहां एक 17 साल के किशोर कुणाल गुर्जर की जान ले ली। परिवार का आरोप है कि ये आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या जैसा मामला है। क्योंकि उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव और खतना कराने की कोशिश की गई थी। ये कहानी सिर्फ दर्दनाक नहीं, बल्कि उन कमज़ोर सुरक्षा तंत्रों पर सवाल खड़ा करती है जो मासमू बच्चों को बचा नहीं पा रहे।
घर में फांसी के फंदे पर लटका मिला कुणाल गुर्जर
दो दिन पहले खबर सामने आई कि टोंक के महावीर नगर का रहने वाला एक 17 साल का छात्र कुणाल गुर्जर सुबह अपने घर पर फंदे से लटका मिला।उसके परिवार का आरोप है कि उस पर धर्म बदलने का दबाव बनाया गया और इसीलिए उसका खतना तक करा दिया था।
परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई, जिसमें कुछ आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई, लेकिन जांच जारी है।
तो ये था पूरा मामला
पहले तो ये एक सामान्य घटना लग रही थी लेकिन मृतक किशोर के परिजनों ने अब जो आरोप लगाए हैं, वो इसे बेहद गंभीर बना रहे हैं। दरअसल मृतक के परिजनों का कहना है कि उनका बेटा पिछले करीब दो साल से एक मुस्लिम लड़की और उसके परिवार के संपर्क में था और धीरे-धीरे उस लड़की के परिजनों ने उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालना शुरू कर दिया था।
पहले मुस्लिम लड़की ने खुद प्रपोज़ किया फिर 'निकाह' का दबाव बनाया
परिवार के मुताबिक लड़की ने खुद उनके बेटे को प्रपोज़ किया था। फिर शादी करने का दबाव बनाने लगी। लड़की के परिवार ने भी शादी ना करने पर धमकी देना शुरू कर दिया। धर्म बदलने और खतना कराने की धमकी देने लगे। परिवार ने बताया कि इसी लगातार दबाव और मानसिक तनाव की वजह से उनका बेटा टूट गया और ये कदम उठा लिया।
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इलाके में तनाव, प्रदर्शन और राजनीति
इसी घटना के बाद शहर में प्रदर्शन भड़क उठे। स्थानीय हिंदू संगठनों ने घंटाघर चौक पर विरोध जताया, टायर जलाए और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने जेल और सख्त जांच की मांग की, परिवार को मुआवजा और सरकारी नौकरी की भी मांग उठाई, पुलिस से निष्पक्ष कार्रवाई की गुहार लगाई।
वहीं पुलिस का कहना है कि शिकायत दर्ज की गई है और जांच जारी है, लेकिन अभी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। दूसरी तरफ इस मुद्दे पर सचिन पायलट की चुप्पी पर भी लोग निराश हैं, वो उनके खिलाफ आक्रोश जता रहे हैं।
मां ने कहा आला अधिकारियों ने नहीं किया ट्रांसफर
इधर मृतक की मां ने भी बताया कि वे जेल में काम करती हैं, उन्होंने अपने आलाअधिकरियों से ट्रांसफर की मांग की, कि यहां से परिवार चला जाएगा तो शायद उनके बेटे का पीछा वो लोग छोड़ दें, पुलिस में शिकायत भी दी लेकिन किसी ने कोई मदद नहीं की।
अब जरा सोचिए कि एक किशोर को मानसिक उत्पीड़न, धमकियों और धार्मिक दवाब में रखा जाता है? उसे धर्म परिवर्तन और खतना जैसी घटनाओं से गुजरना पड़ता है। और शासन प्रशासन ऐसे ही चुप्पी साधे रहता है, फिर एक कुणाल गुर्जर फांसी पर लटक जाता है। ऐसे सवाल सिर्फ एक सुसाइड केस नहीं रचते, ये एक अपराध नेटवर्क और मानसिक उत्पीड़न का संकेत है।
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