असम में NDA को प्रचंड बहुमत, मियां-मामा के नारे ने पलटा गेम, जानें हिमंता कैसे कांग्रेस पर पड़े भारी? BJP की हैट्रिक के 5 बड़े कारण

असम में NDA को प्रचंड बहुमत, मियां-मामा के नारे ने पलटा गेम, जानें हिमंता कैसे कांग्रेस पर पड़े भारी? BJP की हैट्रिक के 5 बड़े कारण
राजनीति
04 May 2026, 12:51 pm
रिपोर्टर : Rakesh Choudhary

Assam Assembly Election Result 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 के रुझान अब धीरे-धीरे नतीजों में बदलते जा रहे हैं। अब तक नतीजों से यह स्पष्ट हो गया है कि बीजेपी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। अब तक के नतीजों के अनुसार बीजेपी की अगुवाई वाला एनडीए गठबंधन 98 सीटों पर आगे चल रहा है। बता दें कि असम में बीजेपी ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ा था। ऐसे में बीजेपी खुद 75 सीटों पर आगे चल रही है। बीजेपी खुद अपने दम पर सरकार बनाती नजर आ रही है। असम विधानसभा चुनाव में सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने पूरी ताकत झोंक दी थी। ऐसे में आइये जानते हैं बीजेपी की जीत के 5 बड़े कारण-

1.हिमंता का इमोशनल कार्ड

सीएम हिमंता ने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान स्वयं को मामा कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वे बच्चों, बुजुर्गो और महिलाओं के लिए सीएम नहीं बल्कि मामा हैं। यहां पर हिमंता ने इमोशनल कार्ड खेला इसका फायदा कहीं ना कहीं बीजेपी को हुआ।

2.स्कीमों से महिलाओं को साधा

सीएम ने अरुणोदयी 2.0 योजना के जरिए महिलाओं के खाते में सीधे पैसे ट्रांसफर किए। इससे महिलाओं ने एकतरफा बीजेपी को वोट दिए। इसके अलावा चुनाव से पहले सरकार ने मदद बढ़ा दी। इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला।

3.विकास पुरुष की छवि

हिमंता ने पूरे पांच साल में कई बार प्रदेश का दौरा किया। बाढ़ के दौरान खुद को असहाय नहीं बताया। वे नाव के जरिए लोगों के पास पहुंचे। उनको आर्थिक मदद की। ऐसे में लोगों ने हिमंता में जुझारू नेता देखा। जिसका फायदा बीजेपी को मिला। लोगों को लगा कि वे 24/7 हमारे लिए काम करते हैं। ऐसे में उनकी छवि विकास पुरुष की बनी। पूरे प्रदेश में उन्होंने सड़कों और ब्रिज का जाल बिछाया।

ये भी पढ़ेंः Assembly Elections 2026: बंगाल में हो गया ‘पोरिबर्तन', पहली बार बीजेपी सरकार, असम में हिमंता तो पुडुचेरी में एक बार फिर NDA

4.लव जिहाद और लैंड जिहाद

बंगाल के बाद सबसे अधिक बांग्लादेशी घुसपैठिए असम में थे। हिमंता ने एसआईआर के जरिए पहले इनकी पहचान की। फिर उनको असम से बाहर निकाला। ऐसे में हिंदुओं और असमिया लोगों को लगा कि हिमंता ने उनकी जमीन और बेटियों को बचाने का काम किया है। हिमंता ने घुसपैठियों की समस्या को असम की अस्मिता और अस्तित्व से जोड़ा और इसका फायदा भी बीजेपी को मिला। हिमंता ने पूरे चुनाव के दौरान अल्पसंख्यक यानी मुस्लिमों को मियां कहा। इससे हिंदू वोटों का एकीकरण हुआ। हिमंता लोगों को यह समझाने में सफल रहे कि हिंदुओं को एक होना क्यों जरूरी है?

5.कांग्रेस की रणनीति

कांग्र्रेस ने इस चुनाव के लिए छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन किया। लेकिन उनकी रणनीति बुरी तरह विफल रही। कांग्रेस ने आईयूडीएफ से इस चुनाव में गठबंधन नहीं किया। जिससे मुस्लिम वोट बिखर गए। इसका भी नुकसान कांग्रेस को हुआ। गौरव गोगोई को पार्टी ने चेहरा बनाया। इससे कांग्रेस के वर्करों में नाराजगी देखी गई। असम कांग्रेस के कई नेता चुनाव से ऐन पहले बीजेपी में चले गए। इससे कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ। सबसे बड़ी बात कांग्रेस ने डैमेज कंटोल की कोशिश भी नहीं की। ऐसे में पूरे चुनाव के दौरान कांग्रेस के वर्कर फील्ड से गायब दिखे।

ये भी पढ़ेंः तमिलनाडु में विजय बने ‘थलापति’, अब क्या बीजेपी के गठबंधन वाली AIADMK से मिलाना पड़ेगा हाथ?


इस लिंक को शेयर करें

ads

लेटेस्ट खबरें

ads
© 2025 Bharat Raftar. All rights reserved. Powered By Zentek.