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PM Modi के 12 साल: रेहड़ी-पटरी वालों मजदूरों की वो योजनाएं, जिनके बारे में शायद आप नहीं जानते!

PM Modi के 12 साल: रेहड़ी-पटरी वालों मजदूरों की वो योजनाएं, जिनके बारे में शायद आप नहीं जानते!
राष्ट्रीय
10 Jun 2026, 05:16 pm
रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने एक नया राजनीतिक इतिहास रच दिया है। लगातार 4,399 दिन प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए नरेंद्र मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। नेहरू 1952 के पहले आम चुनाव के बाद लगातार 4,398 दिन प्रधानमंत्री रहे थे। 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले नरेंद्र मोदी अब भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित PM बन चुके हैं। बीजेपी इस उपलब्धि को लेकर देशभर में कार्यक्रम कर रही है और सरकार अपनी उपलब्धियां गिना रही है। लेकिन आज हम जनधन योजना, उज्ज्वला योजना या आयुष्मान भारत जैसी चर्चित योजनाओं की बात नहीं करेंगे। आज हम आपको बताएंगे मोदी सरकार की ऐसी 5 योजनाओं के बारे में, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, जिनका फायदा सीधे गरीबों, मजदूरों, रेहड़ी-पटरी वालों और आम लोगों को मिल सकता है। तो चलिए शुरू करते हैं।

इन योजनाओं के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी

देश में करोड़ों लोग ऐसे हैं जो सरकारी योजनाओं के पात्र होने के बावजूद सिर्फ इसलिए उनका फायदा नहीं उठा पाते क्योंकि उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं होती। केंद्र सरकार ने पिछले कुछ सालों में कई ऐसी योजनाएं शुरू की जो सीधे समाज के कमजोर वर्गों को टारगेट करती हैं। इनमें से पहली योजना है प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना।

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना

अगर आप रिक्शा चलाते हैं, रेहड़ी लगाते हैं, मजदूरी करते हैं या इनफॉर्मल सेक्टर में काम करते हैं तो ये योजना आपके लिए बेहद अहम हो सकती है। क्योंकि ये योजना इन्हीं लोगों के लिए ही पेंशन देने के लिए शुरू की गई है। इस योजना के तहत 18 से 40 साल की उम्र के वो लोग आवेदन कर सकते हैं जिनकी महीने की आय 15 हजार रुपये से कम है। इसके तहत 60 साल की उम्र पूरी होने पर लाभार्थी को हर महीने 3 हजार रुपये की निश्चित पेंशन दी जाती है। बता दें कि ये योजना 15 फरवरी 2019 को शुरू की गई थी और अब तक 52 लाख से ज्यादा लोग इसमें रजिस्टर्ड हो चुके हैं।

पीएम राहत योजना

अब बात दूसरी योजना की, जो सीधे जिंदगी और मौत से जुड़ी है। क्योंकि देश में हर साल लाखों रोड एक्सीडेंट होते हैं और कई बार इलाज शुरू होने में देरी से मौतें हो जाती हैं। इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने रोड एक्सीडेंट विक्टिम हॉस्पिटलाइजेशन एंड एश्योर्ड ट्रीटमेंट योजना शुरू की है। इसे पीएम राहत योजना के नाम से भी जाना जाता है। इसकी शुरूआत इसी साल 13 फरवरी को हुई थी। इसके तहत सड़क दुर्घटना में घायल शख्स को अस्पताल पहुंचने के बाद शुरुआती 48 घंटे तक 1.5 लाख रुपये तक का फ्री इमरजेंसी इलाज मिलता है। ये सुविधा एक्सीडेंट की तारीख से 7 दिनों तक की मान्य रहती है। ये पूरी तरह से डिजिटल योजना है। सिर्फ घायलों को तुरंत 112 नंबर की एम्बुलेंस से पास के अस्पताल पहुंचाया जाता है।

NFBS योजना का क्या लाभ

अब तीसरी योजना की बात करते हैं, जो गरीब परिवारों के लिए किसी सहारे से कम नहीं है। ये है नेशनल फैमिली बेनिफिट स्कीम यानी NFBS, जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए चलाई जाती है। इसके तहत अगर परिवार के उस सदस्य की अकाल मौत हो जाती है तो सरकार उसके परिवार को 20 हजार रुपये की एकमुश्त आर्थिक मदद देती है। हालांकि ये राशि बहुत बड़ी नहीं मानी जा सकती, लेकिन संकट और दुख की घड़ी में ये परिवार के लिए तत्काल राहत का काम करती है।

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स्वनिधि से समृद्धि योजना

अब बात चौथी योजना की, जो सिर्फ आर्थिक मदद नहीं बल्कि गरीब परिवारों को कई सरकारी सुविधाओं से जोड़ने की कोशिश करती है। ये योजना है स्वनिधि से समृद्धि। ये पीएम स्वनिधि योजना का हिस्सा है। इसे रेहड़ी-पटरी वाले और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा के लिए शुरू किया गया है।

इस योजना के तहत इन लोगों उज्ज्वला योजना, राशन कार्ड, जीवन बीमा, सामाजिक सुरक्षा और दूसरी सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है।

समर्थ योजना से टेक्सटाइल सेक्टर की ट्रेनिंग

अब आखिरी योजना की बात करते हैं। अगर आप युवा हैं और नौकरी की तलाश में हैं, तो ये योजना आपके लिए बेहद अहम हो सकती है और ये है समर्थ योजना यानी Scheme for Capacity Building in Textile Sector. जो कपड़ा उद्योग में कौशल विकास के लिए शुरू की गई है। इस योजना के तहत युवाओं को टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर के कामों की ट्रेनिंग दी जाती है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद रोजगार और प्लेसमेंट में भी मदद की जाती है।

तो ये थीं मोदी सरकार की 5 ऐसी योजनाएं जिनकी चर्चा अक्सर मुख्यधारा की बहसों में कम होती है, लेकिन जिनका सीधा फायदा गरीब, मजदूर, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच सकता है। सरकार की योजनाएं तभी सफल मानी जाती हैं जब उनकी जानकारी पात्र लोगों तक पहुंचे और वे उनका लाभ उठा सकें।

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