...तो क्या जीरो नंबर वालों को भी मिल रही थी नौकरी? चपरासी भर्ती में हाईकोर्ट ने रद्द की अलग-अलग मेरिट कटऑफ

Rajasthan 4th Grade cut off: राजस्थान हाईकोर्ट ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 की अलग-अलग कटऑफ को रद्द कर दिया है। इसमें RSSB की अजीबो-गरीब मेरिट लिस्ट को देखकर हाईकोर्ट हैरान रह गया था। इसमें तीनों मेरिट 0 ही थीं। कोर्ट ने कहा कि सरकारी सेवा में एक बेसिक स्टैंडर्ड तो तय किए ही जाने चाहिए। ये 0, 0 मेरिट कहां से आई है। चाहे फोर्थ ग्रेड क्यों ना हो, मेरिट तो एक तय ही करें। गौरतलब है कि ये भर्ती परीक्षा भजनलाल सरकार की और इस साल की सबसे बड़ी भर्ती थी, ये 53,749 पदों के लिए निकाली गई थी।
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) उन होनहारों को चपरासी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बनाने की तैयारी में था, जिन्होंने परीक्षा में 0.0033 अंक हासिल किए थे। यानी सीधे शब्दों में कहें तो 'प्योर जीरो'। ये कटऑफ जनरल कैटेगरी (Ex सर्विसमैन), SC-ST (विडो) तीनों के लिए ही एक ही थी। वहीं OBC-MBC (विडो) के लिए भी यही कट ऑफ थी। 53,749 पदों के लिए 24 लाख 75 हजार बेरोजगारों ने फॉर्म भरा था। जब जनवरी में रिजल्ट आया, तो कुछ रिजर्व कैटेगिरी की कट-ऑफ देखकर लोगों के होश फाख्ता हो गए।

कैसे खुला ये मामला?
जब इस भर्ती के एक अभ्यर्थी विनोद कुमार ने हाईकोर्ट में कहा कि उन्होंने भी परीक्षा दी थी लेकिन उनके नंबर आ गए माइनस में. चयन बोर्ड ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। विनोद कुमार के वकील हरेंद्र नील ने जज साहब के सामने ऐसी दलील दी कि जज साहब भी सोच में पड़ गए। वकील साहब ने कहा- जब 0 नंबर लाने वाला बुद्धिमान है और उसे आप नौकरी दे रहे हैं, तो माइनस नंबर लाने वाले ने क्या बिगाड़ा है? 0 और माइनस वाले की योग्यता में अंतर ही क्या है? दोनों ही महान हैं! जब पद खाली पड़े हैं, तो हमारे माइनस वाले मुवक्किल को भी चपरासी की नौकरी दी जाए।
हाईकोर्ट ने लगाई सरकार और RSSB को फटकार
जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने इस व्यवस्था पर RSSB को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि ये स्थिति हैरान करने वाली और 'शॉकिंग' है! भले ही पद चतुर्थ श्रेणी का हो, लेकिन सरकारी सेवा में एक 'बेसिक स्टैंडर्ड' यानी बुनियादी गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है। जो इंसान परीक्षा में जीरो या माइनस नंबर ला रहा है, उसे आप सरकारी महकमे की जिम्मेदारी कैसे सौंप सकते हैं?
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जब कोर्ट ने सरकार के कार्मिक विभाग से पूछा कि ऐसा अनर्थ क्यों हो रहा था? तो बोर्ड और सरकार का जवाब बड़ा अतार्किक था। उन्होंने कहा कि चतुर्थ श्रेणी भर्ती नियमों में 'न्यूनतम अंक' का कोई नियम ही नहीं लिखा है. अब जब नियम में नहीं है, तो हमें जो भी मिला, उसे हमने चुन लिया। हाईकोर्ट ने सरकार के इस लचर तर्क को सिरे से खारिज कर दिया और साफ शब्दों में कहा- "न्यूनतम अंक तय किए बिना किसी भी कैटेगिरी में भर्ती करना पूरी तरह से असंवैधानिक है।"
दोबारा से निकालें 'सम्मानजनक कटऑफ'
कोर्ट ने साफ आदेश दिया है कि जिन-जिन कैटेगिरी की कट-ऑफ जीरो के आसपास थी, उन सभी की मेरिट लिस्ट को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाता है। अब कोर्ट के इस फैसले का सीधा मतलब ये है कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को अब नींद से जागना होगा। उन्हें पहले एक सम्मानजनक न्यूनतम पासिंग मार्क्स (जैसे 35% या 40%) तय करना होगा, और उसके बाद इन कैटेगिरी की नई मेरिट सूची जारी करनी होगी।
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