कुचेरा-डेगाना में भारी बवाल, पार्षदों को ले जा रही पुलिस... कांग्रेस बोली- जीते हुए प्रत्याशियों पर बीजेपी का दबाव

नागौर: राजस्थान निकाय चुनाव के नतीजों के बाद अब नगर पालिकाओं में अध्यक्ष पद को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। नागौर जिले के कुचेरा और डेगाना में कांग्रेस और बीजेपी के बीच संख्या बल जुटाने की कोशिशों के बीच पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कुचेरा में कांग्रेस के निर्वाचित पार्षद निंबाराम को ले जाने के लिए भारी पुलिस जाब्ता पहुंचा, जबकि डेगाना में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच टकराव के बाद हंगामे की स्थिति बनी।
कांग्रेस ने दोनों घटनाओं को पार्षदों पर दबाव बनाने की कार्रवाई बताया है। दूसरी तरफ कुचेरा मामले में पुलिस का कहना है कि पार्षद के रिश्तेदार (साला) की तरफ अपने जीजा के अपहरण की शिकायत मिली थी, जिसके बाद उनके बयान लेने के लिए पुलिस पहुंची थी।
कुचेरा में क्या हुआ?
नागौर की कुचेरा नगरपालिका में कुल 25 वार्ड हैं। चुनाव में कांग्रेस ने 12, बीजेपी ने 8 और निर्दलीयों ने 5 सीटें जीती हैं। अध्यक्ष बनाने के लिए 13 पार्षदों के समर्थन की जरूरत है। यानी कांग्रेस बहुमत से सिर्फ एक सीट दूर है और बीजेपी को बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीयों के समर्थन की जरूरत है। यही वजह है कि एक-एक पार्षद का समर्थन बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
इसी राजनीतिक खींचतान के बीच वार्ड नंबर 9 से निर्वाचित कांग्रेस पार्षद निंबाराम को लेकर विवाद सामने आया। निंबाराम के साले ने उनके अपहरण की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई। इसके बाद मूंडवा DSP धर्म पूनिया के नेतृत्व में पुलिस टीम उस जगह पहुंची जहां कांग्रेस के पार्षद ठहरे हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने निंबाराम को अपने साथ ले जाने की बात कही और वहां मौजूद परिसर की तलाशी भी ली।
हालांकि, निंबाराम ने बाद में वीडियो जारी कर अपहरण से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वे सुरक्षित हैं और अपनी इच्छा से वहां मौजूद हैं। एक दूसरे वीडियो में उन्होंने अपने साले की शिकायत को भी गलत बताया।
यही वजह है कि इस मामले में फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने हैं—एक तरफ अपहरण की शिकायत और दूसरी तरफ खुद पार्षद का अपहरण से इनकार।
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कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर कुचेरा की घटना को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुचेरा को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है और कांग्रेस के निर्वाचित पार्षद निंबाराम को ले जाने के लिए भारी पुलिस बल भेजा गया। डोटासरा ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन के जरिए निकाय चुनाव के जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस के चेयरमैन प्रत्याशी तेजपाल मिर्धा ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए वीडियो जारी किया। उनका आरोप है कि बीजेपी सरकार के दबाव में कांग्रेस पार्षद को जबरन ले जाने की कोशिश की जा रही है।
एक दिन पहले भी हुआ था विवाद
कुचेरा में विवाद केवल निंबाराम तक सीमित नहीं है। 17 सितंबर को कांग्रेस समर्थित पार्षदों के शपथ ग्रहण के बाद उनके नागौर जाने के दौरान भी विवाद सामने आया था। कांग्रेस खेमे ने आरोप लगाया कि कुछ वाहनों ने उनका पीछा किया और उनकी गाड़ियों को टक्कर मारने की कोशिश की गई। इसके बाद पुलिस सुरक्षा में पार्षदों को नागौर ले जाया गया। हालांकि, बीजेपी नेता रिछपाल मिर्धा ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि उनके पक्ष का इस घटना से कोई संबंध नहीं है।
डेगाना में भी पुलिस-कांग्रेस आमने-सामने
उधर नागौर के ही डेगाना में भी निकाय चुनाव से जुड़ा विवाद सड़क पर आ गया। 17 सितंबर को SDM कार्यालय के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई और पुलिस ने लाठीचार्ज किया। घटना के बाद ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश कुंकणा को गिरफ्तार किए जाने की रिपोर्ट सामने आई। 18 सितंबर को भी डेगाना में पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की खबर सामने आई।
गहलोत ने भी लगाए पार्षदों पर दबाव के आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी निकाय चुनावों के बाद कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों पर पुलिस के जरिए दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया है। 17 सितंबर को गहलोत ने आरोप लगाया कि पार्षदों को डराया-धमकाया जा रहा है और पुलिस तथा सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल बोर्ड गठन को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने बीजेपी पर पार्षदों को करोड़ों रुपये के प्रलोभन देने का भी आरोप लगाया।
टीकाराम जूली पहले भी उठा चुके हैं सवाल
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी निकाय चुनावों के दौरान पुलिस के पार्षदों को तलाशने और कथित तौर पर दबाव बनाने को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिस की ड्यूटी अपराधियों को पकड़ने के बजाय पार्षदों को तलाशने में लगाई जा रही है।
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