चर्चा में बाड़मेर की सियासत, हरीश चौधरी के बयान का निशाना गहलोत या समूची कांग्रेस?

Rajasthan Politics: राजस्थान कांग्रेस के कद्दावर नेता और मध्य प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी का एक बयान फिर से प्रदेश की सियासत में चर्चा में है। यहां उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मंत्री केके बिश्नोई, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बारे में काफी कुछ कहा। उनके बयान से ऐसा लगने लगा है कि कांग्रेस में सब कुछ तो ठीक नहीं चल रहा है।
'सब केके बिश्नोई की तरफ चले गए'
हरीश चौधरी ने कहा कि “डुंगरपुरी मठाधीश जगदीशपुरी महाराज ने मौजूद सभी नेताओं से सूईयां अर्धकुंभ मेले के लिए श्रद्धालुओं के लिए नहाने के लिए घाट और अन्य व्यवस्थाओं के लिए 5 से 6 करोड़ रुपयों की डिमांड की थी। वैसे तो हम लोग आमने-सामने मुकाबला करते रहते हैं लेकिन अब धीरे-धीरे केके बिश्नोई की तरफ सब चले गए। शिव विधायक रविंद्र भाटी भी चले गए। बहन प्रियंका चौधरी चली गईं। अंदर-अंदर ही मामला उस तरफ चला गया।“
हरीश चौधरी ने कहा कि “हम थोड़े बहुत ही सामने खड़ें हैं। पर इस काम के लिए हम भी आपको विश्वास दिलाते हैं कि सामने खड़े हैं, हमसे जो भी होगा, हम पूरे मन से करेंगे। पहले जो हमारे मुख्यमंत्री जी थे उनके बारे में ना ही बोलूं तो इस पवित्र जगह के लिए ठीक है। भजनलाल शर्मा (CM) के और केके बिश्नोई के तार जुड़े हैं। मेरे तो आज कल एमपी चुनाव के बाद में राम-श्याम (हाल-चाल लेना) ही बंद हो गई। अब तो सांसद उम्मेदाराम ही हाल-चाल ले आते हैं, मैं तो वही सुन लेता हूं।“
ये हरीश चौधरी का गुस्सा और दर्द
अब हरीश चौधरी का इन बातों को विश्लेषण करने वाले जानकार कह रहे हैं कि इन बातों के पीछे छिपा राजनीतिक दर्द और गुस्सा महसूस हो रहा है। लोकसभा चुनावों के बाद मारवाड़ की राजनीति का ताना-बाना किस कदर बदल चुका है और कांग्रेस के भीतर नेताओं के रिश्ते किस स्तर तक बिगड़ चुके हैं। ये पूरा बानगी उनके इस बयान से पता चल रही है।
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मारवाड़ की राजनीति में गहलोत और हरीश चौधरी के बीच के छत्तीसगढ़ के आंकड़े किसी से छिपे नहीं हैं। चुनाव के दौरान और चुनाव के बाद टिकट वितरण से लेकर सांगठनिक फैसलों तक, हरीश चौधरी खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं और उनका यह दर्द इस पवित्र मंच से गुस्से के रूप में बाहर आ गया।
उम्मेदाराम की बीजेपी से नजदीकी पर खफा?
हरीश चौधरी का ये कहना कि 'एमपी चुनाव के बाद मेरा राम-श्याम बंद हो गया है वो भी काफी सोचने वाली बात है। उम्मेदराम बेनीवाल जो RLP छोड़कर कांग्रेस में आए और सांसद बने, उनके बढ़ते कद और सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और के.के. बिश्नोई से संपर्कों को लेकर हरीश चौधरी ने एक बड़ा सस्पेंस खड़ा कर दिया है। क्या मारवाड़ में हरीश चौधरी को दरकिनार कर उम्मेदराम बेनीवाल को आगे बढ़ाया जा रहा है? क्या कांग्रेस के नए सांसद के तार बीजेपी सरकार से सीधे जुड़ चुके हैं? ये हरीश चौधरी का एक बहुत बड़ा राजनीतिक इशारा है।
हरीश चौधरी के इस बयान से साफ है कि वो मारवाड़ में अपनी राजनीतिक जमीन को लेकर बेहद आक्रामक हैं। वो यह कतई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं कि कोई दूसरा नेता उनके प्रभाव क्षेत्र में आकर सीधे ब्यूरोक्रेसी या सत्ता पक्ष से डीलिंग करे।
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