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उदयपुर कोर्ट ने खारिज की धर्मांतरण के 11 आरोपियों की जमानत याचिका, ग्रामीणों को नया कुआं खुदवाने का दिया था प्रलोभन

उदयपुर कोर्ट ने खारिज की धर्मांतरण के 11 आरोपियों की जमानत याचिका, ग्रामीणों को नया कुआं खुदवाने का दिया था प्रलोभन
राजस्थान
13 Jun 2026, 06:34 pm
रिपोर्टर : Rakesh Choudhary

Udaipur conversion case: उदयपुर की एडीजे कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए धर्मांतरण के 11 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। बता दें कि पूरा मामला ऋषभदेव थाना क्षेत्र के कानूवाड़ा बिलखाई गांव का है। बता दें कि पुलिस ने 6 जून को प्रार्थना सभा में धर्म परिवर्तन कराने के मामले में 11 लोगों को अरेस्ट किया था। मामले की सुनवाई करते हुए एडीजे कोर्ट ने कहा कि किसी को लालच देकर या जबरन धर्म परिवर्तन करवाना देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरनाक है।

मामले में पीड़ित नानालाल ने थाने में दी शिकायत में बताया कि आरोपियों ने उसे ईशा भगवान की प्रार्थना सभा के नाम पर बुलाया और वहां उसकी बीमारी ठीक करने, घर पर नया कुआं और हैंडपंप खुदवाने का प्रलोभन दिया। प्रार्थना सभा में पहले से ही 200 लोग मौजूद थे। इसके बाद जब मैंने धर्म बदलवाने से मना कर दिया तो आरोपियों ने उसके साथ मारपीट और गाली-गलौज की। मामले में पुलिस ने नानालाल की शिकायत पर राजस्थान विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2025 के तहत मामला दर्ज कर लिया।

कोर्ट में वकीलों ने दिए ये तर्क

कोर्ट में शनिवार को आरोपियों के वकील ने दलीलें देते हुए कहा कि आपसी विवाद में इनको फंसाया जा रहा है। जबकि नानालाल की ओर से दलीलें देते हुए वकीलों ने कहा कि आरोपियों ने बिना किसी की अनुमति के सार्वजनिक जगह पर लाउडस्पीकर लगाकर सभा की। गरीब और समाज के निचले तबके के लोगों को चमत्कार और पैसों का लालच देकर सामूहिक धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। वकीलों ने कहा कि पुलिस को मौके से ईसाई धर्म की 17 किताबें, सीडी और फोटोग्राफ भी मिले हैं।

कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां सभी को धर्म को मानने की आजादी है। इसका मतलब यह नहीं है कि कोई प्रलोभन और लालच देकर धर्म बदलवाए और उनकी आस्था को ठेस पहुंचाए। बता दें कि सरकार ने धर्म परिवर्तन को लेकर कानून को और कड़ा कर दिया है। नए कानून के तहत इसमें 20 साल की जेल और 10 लाख के जुर्माने का प्रावधान है।

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