ऐसा क्या कर दिया भजनलाल सरकार ने कि CAG ने दे दी चेतावनी- पिछली बार किया, इस बार मत कर देना

CAG on Rajasthan BJP Government: भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने प्रदेश की बीजेपी सरकार को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए चिट्ठी लिखी और अहम जानकारी मांगी है। इस बात की गंभीरता इसी बात से समझी जा सकती है कि कैग ने सरकार को कहा है आधी अधूरी जानकारी पिछली बार उन्होंने भेजी थी इस बार ऐसा नहीं होना चाहिए। दरअसल कैग ने OPS यानी ओल्ड पेंशन स्कीम से अगले 10 साल में पड़ने वाले आर्थिक बोझ का ब्यौरा मांगा है। ये अपनी तरह का पहला मौका है जब कैग ने सरकार से इतने सख्त लहजे में सवाल पूछे हैं। कैग ने पूछा है कि OPS से खजाने पर कितना दबाव आने वाला है और सरकार इसे कैसे दिखा रही है। ये पूरी रिपोर्ट 15 जून तक सबमिट करनी ही होगी।
इस पूरी कार्रवाई के पीछे FRBM एक्ट का हवाला दिया गया है, जिसके तहत राज्य सरकार को खर्च, आय-व्यय से जुड़ा हर डेटा कैग के साथ शेयर करना अनिवार्य होता है। गौरतलब है कि राजस्थान में 2022 में NPS हटाकर OPS लागू किया गया था और तब से इसकी वित्तीय स्थिरता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
CAG ने ऑफ-बजट कर्ज का पूरा खुलासा मांग लिया
कैग ने सरकार को लेटर भेज कर पूछा कि बजट दस्तावेजों में छिपे हुए ऑफ-बजट बोरोइंग यानी वो कर्ज, जो सरकार ने सीधे ना लेकर अपनी संस्थाओं और सार्वजनिक उपक्रमों के जरिए लिए, उनके असल हालात क्या हैं? राज्य सरकार आमतौर पर इस कर्ज को बजट में नहीं दिखाती, जिससे राजकोषीय घाटा कम नजर आता है। कैग ने इसे साफ-साफ बताने को कहा है कि 2025-26 में कितना ऑफ-बजट कर्ज लिया है।
साथ ही कर्ज की अलग-अलग कैटेगरी में ब्यौरा मांगा है जैसे- ग्रांट, ब्याज भुगतान के लिए उठाया गया उधार, सरकारी कंपनियों और स्थानीय निकायों का कर्ज शामिल हैं। बता दें कि ये मांगें 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों का हवाला देकर उठाई गई है।
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सरकारी खातों में बिना खर्च पड़ा पैसा कितना है?
सरकार से कैग ने पूछा है कि योजनाओं के नाम पर सरकारी खातों में कितना पैसा पड़ा हुआ है, जो साल भर में खर्च ही नहीं किया गया। कैग ने सरकारी विभागों के बैंक बैलेंस, विभागीय स्टोर्स का सालाना वेरिफिकेशन, अधूरे सरकारी प्रोजेक्ट, सरकारी जमीनों की बिक्री और लीज, सरकारी संपत्तियों की जियो-टैगिंग—ये सभी जानकारी मांगी हैं।
इस बार पहले वाला काम ना करें- CAG
इस चिट्ठी में कैग ने सरकार को ये भी याद दिलाया है कि पिछले साल सरकार ने बजट से जुड़े कई आंकड़े संस्था को देर से भेजे थे और अधूरे भेज दिए थे। इस बार साफ निर्देश हैं कि पूरा रिकॉर्ड भेजा जाए और 15 जून तक पूरा रिकॉर्ड भेजना ही होगा, बहाने नहीं चलेंगे।
पॉपुलर स्कीमों में कैश ट्रांसफर का हिसाब
कैग ने सरकार से पूछा है कि लोकलुभावन योजनाओं में कितना डायरेक्ट कैश ट्रांसफर और कितना DBT (डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर) किया गया। वहीं बिजली सब्सिडी से लेकर किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं में किसे कितना पैसा मिला, इसका जवाब भी सरकार से मांगा गया है। यहां ये बात भी ध्यान देने वाली है कि सरकार जब ये ब्यौरा दे देगी, उसके बाद CAG सभी योजनाओं, कर्ज, खर्च और इनकम का बारीकी से ऑडिट करेगा। अगर किसी प्रावधान का उल्लंघन मिला तो ऑडिट पैरा बनेगा और यह सालाना रिपोर्ट का हिस्सा होगा। बता दें कि ये रिपोर्ट विधानसभा में पेश होती है और आपत्तियों की जांच जनलेखा समिति (PAC) करती है।
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