क्या आज भी देश में इमरजेंसी फिर से लगाई जा सकती है? क्या कहता है भारत का संविधान ?
भारत में आपातकाल को लगे 50 साल बीत चुके हैं. 25 जून की ये तारीख शायद ही कोई देशवासी भूल सकेगा. ये वो तारीख थी जिस दिन भारत के नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ.
भारत में आपातकाल को लगे 50 साल बीत चुके हैं. 25 जून की ये तारीख शायद ही कोई देशवासी भूल सकेगा. ये वो तारीख थी जिस दिन भारत के नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ. लेकिन आज भी एक सवाल ऐसा है जिसका जवाब हर किसी को चाहिए. और वो सवाल है कि क्या आज भी देश में आपातकाल लग सकता है.
देश में फिर लग सकता है आपातकाल ?
सुप्रीम कोर्ट के एक वकील की ओर से ये जानकारी दी गई है कि आज का भारत 50 साल पहले का भारत नहीं है. इसलिए आज के समय में आपातकाल नहीं लगाया जा सकता. आज जनता सोशल मीडिया के जरिए काफी जागरूक हो चुकी है. हर नागरिक को उसके मूल अधिकारों के बारे में पता है. आज भारत का संविधान और सुप्रीम कोर्ट सबसे ताकतवर है. जो किसी की तानाशाही को रोकने के लिए पर्याप्त है. अगर आज कोई इस तरह का फैसला लेता भी है तो सुप्रीम कोर्ट उस फैसले पर रोक लगा सकता है.
44वें संविधान संशोधन अधिनियम में क्या है ?
- आपातकाल के खत्म होने के बाद संविधान का 44वां संशोधन 1978 किया गया.
- इसके तहत कार्यपालिका की आपातकालीन शक्तियों के दुरुपयोग को रोकने की बात कही गई.
- अधिनियम में आंतरिक अशांति के स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द का प्रावधान किया गया, जिसमें राष्ट्रपति मंत्रिमंडल की लिखित अनुशंसा के बाद ही आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं.
- आपातकाल की उद्घोषणा को मंजूरी मिलने के बाद अब अस्वीकृति पर विचार के लिए लोकसभा की विशेष बैठक हो सकती है.
- युद्ध या बाहरी आक्रमण के आधार पर आपातकाल घोषित होने पर अनुच्छेद 19 खुद निलंबित हो जाएगा.
- अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों को किसी भी हाल में निलंबित नहीं किया जा सकता.
- अब प्रधानमंत्री के लिए बिना किसी लिखित स्पष्टीकरण के आपातकाल की घोषणा के बारे में एकतरफा निर्णय लेना संभव नहीं.
- अधिनियम ने यह अनिवार्य है कि आपातकाल की घोषणा के पारित होने की छह महीने बाद समीक्षा की जाएगी.
- नए सिरे से संसदीय अनुमोदन के अभाव में आपातकाल को निलंबित कर दिया जाएगा.